तेरी कार या मेरी कार...
आज सैटरडे था । छुट्टी होते हुए भी वो वक़्त से जाग गई थी उसे सारे दिन के लिए घर से निकलना था ।घर के काम भी निबटाने थे ।
और फिर सबसे बड़ा मिशन समर को पहले इन्फॉर्म करना और फिर राज़ी भी करवाना था वो भी चंद घंटों में । उसे अंदेशे तो थे समर के रिएक्शन को लेकर मगर उसने भी पक्का इरादा कर लिया था । इस दफ़ा वो क़दम पीछे नहीं लेगी ..चाहे उसे समर की नाराज़गी ही क्यों न झेलनी पड़े ।
उसने फटाफट चाय बनाई और समर के पसंदीदा नमक पारे लेकर दोनों की चाय इकट्ठी लिए अपने बेडरूम में आई थी।
गुड मॉर्निंग..
समर चाय लें..और फ्रेश हो जाएँ न.. मुझे कुछ बात करनी है आपसे।
फराह के इस अंदाज से समर एक दम से उठकर बैठ गया था ।
क्या हुआ फराह .. आज तो सैटरडे है । कहीं तुम्हारे ऑफिस में कोई एक्स्ट्रा वर्क तो नहीं है।
फराह ने वैसे ही कहा था ।
नहीं नहीं समर .. ऐसी कोई बात नही है । मैंने ऑफिस में पहले ही मना कर रखा है। एक्स्ट्रा प्रोजेक्ट्स के लिए ।
दो ही दिन तो मुझे मिलते हैं तुम्हारे और शीनू के साथ । उसमे भी कुछ घंटे के लिए भी घर से ऑफिस निकलो तो सारा दिन ही बर्बाद होता है ।
समर फराह की तरफ फिर से पलटते हुए बोला ।
फिर इतनी जल्दी क्यों जाग गई हो । उसने चाय का मग हाथ में लेते हुए कहा ।
पहले चाय पी लें समर..फिर मैं बताती हूँ ।
तुम बताओ न । मैं सुन रहा हूँ यार । आज तुम्हारा कहीं का प्रोग्राम है क्या । अगर है तो देखो आज पॉसिबल नहीं ।आज मैच है फराह। आज मैं बेड से खिसकने वाला भी नहीं हूं ..प्लीज ।और अगर तुम्हे कहीं जाना है तो तुम और शीनू चले जाना लेकिन मुझे माफ़ करो आज ।
समर के इतना कहते ही फराह बिदक गई थी।
ओह्हो समर … पूरी बात तो सुनते नहीं आप और अपने अंदाज़े लगा लेते हैं । कुछ घंटों का ही काम है मुझे और मैंने सारी प्लानिंग कर ली है पहले से ही ।
समर अब फराह की बातों से सरप्राइज होने लगा था।
क्या ..क्या ..कौन सी प्लानिंग । ये किस प्लानिंग की बात कर रही हो फराह तुम ।
फराह अब धीरे से समर के सामने आती है ।
ऐक्चुअली ..वो ..वो समर मैंने अपने लिए एक कार लेनी है । मैने अपने कार लोन के लिए फाइनेंस की बात कर ली है ।आप बस आज साथ चलकर खुद से तसल्ली कर लें न। और मेरे लिए पसंद कर लें ।.बाक़ी सारी बातें तो चंद मिनटों में फाइनल हो जाती हैं आजकल । औऱ ज्यादा कुछ नही है इसमें।
फराह एक सांस में बस कहती ही चली गई थी।
क्या … क्या ??. तुम्हें भला कार क्यूं लेनी है … किसलिए !!!
और तुमने तो पहले बताया नहीं मुझे । कब देखा कब बात की । कैसे लेनी है ।कोई मशवरा नहीं ।ये शीनू की कोई टॉय कार नहीं जो मॉल में गई और ले आई ।
समर की इस बात पर फराह चिढ़ते हुए बोली।
ये क्या कह दिया आपने .. क्या मतलब है आपका समर । और और …ये आप मुझे शीनू की तरह क्यों ट्रीट करते हो आइ नो कि ये शीनू की टॉय कार नहीं है । मुझे पता है मैं क्या कर रही हूं और मैंने सारी बातें ख़ुद डिटेल में की हैं ।
अपने लिए खुद की कार लेनी है ।कोई आसमान से तारे नहीं तोड़ने ।खुद की सैलरी से ईएमआई देनी है मुझे । आपसे तो कोई हेल्प नही मांग रही । समर से बात करते करते अब उसके तेवर बदल गए थे । समर ने बात ही ऐसी चुभनेवाली की थी। फराह के चेहरे के बदले हुए रंग को समर अब फील कर चुका था।
क्या हुआ फराह । इतना माइंड क्यूं कर रही हो तुम। मैंने ऐसा कहाँ कुछ कहा है तुम्हें और इतनी सी बात को कहाँ से कहाँ ले जाती हो तुम । फिर मैंने तो अपनी या तुम्हारी सैलरी की बात भी नहीं की है कभी । इतना अदरवाइज क्यूं ले लिया तुमने ।
फराह अब मुंह बनाते हुए बोली थी।
हम्म… बात नहीं की तो क्या हुआ समर । अभी थोड़ी देर बाद कहनेवाले तो हो ही । यही सब कि ये सब कैसे मैनेज होगा । कितने सारे एक्सपेंसेस हैं हमारे । अभी ये करना है अभी वो बाक़ी है । आपके दिस और दैट और फिर बात ख़त्म हो जाएगी । इसलिए इस दफा मैंने खुद से सारी मालूमात कर ली है । अब आज हमें फाइनली कार फाइनल करके ही आनी है ।
अब समर से बरदाश्त नहीं हुआ , वो चिढ़ते हुए बोला।
जब सब डिसाइड कर ही लिया है तुमने तो मुझसे इन्फॉर्म करने की क्या ज़रुरत है । और ये भी जानती हो कि मैं क्या कहनेवाला हूँ या क्या करनेवाला हूँ । तो इंतज़ार किस बात का ।
जाओ जाकर ले आओ । कहता हुआ वो रूम से निकलकर बालकनी में आ गया था।
फराह को अपनी ग़लती का एहसास हुआ । उसे फील हो गया कि बात बिगड़ रही है । वो झट से उसके पीछे आकर बोली ।
नहीं नहीं समर । मेरा इंटेंशन हरगिज़ ऐसा नहीं था ।दरअसल इससे पहले जब भी हमारे बीच कार का ज़िक्र हुआ वो किसी न किसी वजह से ख़त्म हो गया । और बात आई गई हो जाती है। बस इसलिए समर .मैं मैं आपको इल्ज़ाम नहीं दे रही । आप समझने की कोशिश तो करें ।हफ्ते में दो तीन दिन तो मुझे खुद से ऑटो से ही जाना होता है और मेरी वजह से तुम्हे भी देर होती है ।फिर शाम को शीनू को वापस लेकर आने में भी काफी देर हो जाती है ।थोड़ी तो राहत मिल ही जाएगी कार लेने से ।बस यही थॉट माइंड में रखकर मैंने डिसिजन लिया है । इतना तो कर ही सकती हूं न।
समर काफी देर तक अपने थॉटस में ही रहा था। वो जान चुका था की इस दफा फराह उसके कोरे बहलावे में नहीं आनेवाली ।इस दफा वो सीरियस थी ।और उसकी हाँ और ना भी अब उसके लिए उतनी मायने नहीं रखती ।इसलिए उसे रज़ामंदी तो देनी ही होगी ।
समर को यूं सोचते देख फराह जो कब से उसके जवाब का इंतजार कर रही थी।
क्या हुआ समर कुछ बोलो भी । इस दफ़ा प्लीज मना मत करो न आप ।मैं मैनेज कर लूंगी मैंने कहा ना । फराह भी बच्चों की तरह ज़िद पर ही थी ।
समर ने अब हथियार डाल दिए थे ।
ठीक है ठीक है फराह । इटस फाइन ।जैसा तुम्हे मुनासिब लगे । मुझे अब और इस ऑरग्यूमेंट में नहीं पड़ना ।कहकर वो फ्रेश होने के लिए वाशरूम चला गया ।
और फराह खुशी से उछल पड़ी..वो जानती थी की समर की नाराज़गी टेम्पररी है ।.दो चार रोज़ में ख़त्म हो जाएगी ।
समर ने हामी तो भर दी थी फराह को पर सारा दिन वो यूँ ही बेज़ारी से उसके साथ घूमता रहा ।न उसने कार लेने में न पसंद करने में ही कोई दिलचस्पी दिखाई थी । बस वो खामोशी से कार खरीदने की सारी फोर्मलिटीज़ पूरी कर रहा था ।फराह की ड्राइविंग उतनी परफेक्ट नहीं थी ।इसलिए वो खुद ही कार ड्राइव कर घर लेकर आया ।फराह ने एक हफ्ते तक आस पास ही गाड़ी लेकर निकलने का सोचा हुआ था । फिर फ्री होकर ऑफिस अगले वीक से कार ले जाने का इरादा था उसका । उसने फील किया था कि समर उसके इस फैसले पर दिल से रज़ामंद नहीं था और उसकी बेज़ारी उसके चहरे से साफ़ नुमाया हो रही थी । पर हर वक़्त किसी को खुश नहीं रखा जा सकता और अगर किसी के खुश रखने की सूरत में किसी की आज़ादी और ख्वाहिशात को दबाना पड़े हर वक़्त । तो ऐसी खुशी फ़राहम करने का कोई फायदा नहीं ।