वो कोमा में है........
डॉक्टर्स की टीम बाहर आते ही समर फराह एकसाथ भागते भागते उनके पास पहुंचे थे।
लुक.. मिस्टर एंड मिसेज समर । ……अभी जो मैं आपको कहनेवाला हूँ..उसके लिए हिम्मत और हौसले रखने होंगे आप दोनों को ।
एक्चुअली आपके बच्चे की बॉडी में जो डॉय्ल्यूटेड ड्रग्स पाए गये हैं ,वो धीरे धीरे निकाले जा रहे हैं । पर ये महज़ एक दिन की बात नहीं । उसे लगातार कई मंथ्स से ये मेडिसिंस दी जा रही थीं की बच्चे बस सोते ही रहे ।
और इस वजह से उसकी कंडीशन ज़्यादा ख़राब हुई । बट इसका डेंडली साइड इफेक्ट हुआ बच्चे पर और वो एक लम्बी बेहोशी में चला गया है जिसे मेडिकल टर्म में हम अनकॉंशस स्लीप कहते हैं।
अगर जनरल टर्म में कहा जाए तो वन ऑफ़ दा काइंड ऑफ़ कोमा ।
डॉक्टर्स ने अभी अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि समर ने इंटरप्ट कर दिया ।
क्या कोमा !!!!!!!!!!!!!
कोमा… how is it possible doctor,
समर एकदम से चीख पड़ा था।
हाँ देखिये मिस्टर समर ……आप ऐसे रियेक्ट न करें प्लीज़ ।
मैंने ये कनफर्म नहीं किया की आपका बच्चा कोमा में है । क्यूंकी जिन पेशेंट्स के रिकवरी के चांस होते हैं उनके लिए कोमा नहीं कहा जा सकता ।और यहां इतनी सारी निगेटिव हैपनिंग्स में एक चीज पॉजिटिव है ।
And we are still hopeful कि आपका बच्चा कभी भी होश में आ सकता है। शायद कुछ दिन में ।
मगर इस मुशिकल टाइम मैं आपको कमिट नहीं कर सकता । और न ही कोई टाइम लाइन दे सकता हूं। शायद कुछ महीने भी लग जाएँ । और इसका ट्रीटमेंट अभी शुरू करना होगा ।जो थोड़ा एक्सपेंसिव भी है ।आप मेरे साथ आएं और बाक़ी फॉर्मलिटीज पूरी करें जल्दी ।
इसके लिए मेडिसिन्स इम्पोर्ट करनी होती हैं जो अभी स्टॉक मे नहीं ।
आप चाहें तो उसके पास जा सकते हैं…मगर ध्यान रखें ।
समर डॉक्टर्स के साथ चला गया और फराह फिर शीनू के सिरहाने आकर बैठ गई ।
थोड़ी देर बाद जब समर वापस आया तो उसकी नफरत भरी निगाहें वो बर्दाश्त न कर सकी और बाहर आ गई ।
ये कौन सा मोड़ आया था उसकी हंसती बस्ती ज़िंदगी में ।वो तो उसकी माँ है और उसे ही कटघरे में खड़ा कर दिया था समर ने । क्या सारी ग़लती उसकी थी । क्या सारे क़ुसूर उसी के खाते में दर्ज होनेवाले थे । क्या अपनी ज़िंदगी में आनेवाले सारे दुखों और तकलीफों की वही वाहिद वजह थी ।
तभी नर्स के कहने के बाद समर भी बाहर आ गया था।
और उसके क़रीब आकर बोला ।
अब क्यों रोती हो फराह । तुम तो अब आज़ाद हो । जाओ अपनी आज़ादी के जश्न मनाओ । बच्चे तो तुम्हारी पाँव की बेड़ियाँ है ना । तुम्हारे सुनहरे मुस्तक़बिल के रास्ते में आनेवाले कांटे, जो अब नहीं चुभेंगे कभी । तुमने अपनी ग़फ़लत और लापरवाही से सब गंवा दिया । अब कुछ नहीं बचा ।
समर की ये बातें फराह को और जख्मी कर रही थी , वो जो पहले से ही शीनू के लिए पागल हो रही थी ।
अब बस कर दें, समर। कैसी ग़फ़लत । कौन सी कोताही । मैंने तो हर हाल में अपने सारे फर्ज निभाएं हैं, मगर आप तो मुझे ही मुजरिम बना चुके हैं । दिन रात चौबीस घंटे का साथ है हमारा। आपके सामने ही तो हुआ ये सब ।
मगर मैं तो आपको कुछ नहीं कह रही । आपसे कोई जस्टिफिकेशन नहीं मांग रही । फिर आपमें इस क़दर बेयक़ीनी क्यों आ गई । ये ट्रस्ट इशूज हमारे बीच पहले कभी नहीं थे समर। और इस वक्त् जिंदगी के सबसे मुशिकल दोराहे पर जब हम खड़ें हैं तो आप ऐसी वैसी बातें कर रहे हैं।
मगर समर की तो अपनी ही दलीलें थी।
बेयक़ीनी नहीं फराह । फरेब किया है तुमने । ट्रस्ट इशूज तो अब है हमारे बीच और इसका कुछ नहीं हो सकता।
फराह अब उसके सामने गिड़गिड़ा रही थी.।
नहीं समर , हमारा रिश्ता ऐसा तो हरगिज़ न था । ट्रस्ट इश्यूज तो कभी नहीं थे हमारे दरमियान की हर बात पर मुझे अपनी सफाइयां देनी पड़े ।क्या हो गया आपके ऐतमाद को ।
समर अब भी फराह की कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं था।
ऐतमाद । ऐतमाद तो उसी दिन टूटा था जब वो इंसीडेंट हुआ था। और बेयक़ीनी कहाँ , मैंने तो अँधा ऐतमाद किया था तुम पर । तुम्हारी ज़हानत और क़ाबिलियत पर तो मुझे ग़ुरूर था ।
मैंने एक बार भी अंदेशा तक नहीं किया तुम्हारे फैसलों पर । पर मुझे क्या इल्म था की तुम इतनी केयरलेस और खुदगर्ज़ हो जाओगी की शीनू से भी ग़ाफ़िल हो जाओगी ।
वो बस एक के बाद एक अपने आयेद इल्ज़ामों से छलनी करता जा रहा था उसका दिल, उसका वजूद पर वो अब धीरे धीरे खामोश हो रही थी ।
समर अब एकदम उसके सामने आ गया था।
अब क्यों खामोश हो फराह । चली जाओ यहाँ से । मुझे अभी पैसों का इंतज़ाम करने जाना है वक़्त कम है ।
मगर एक इल्तेजा है तुमसे । मेरी वापसी तक ही रहना यहाँ । फिर मेरे सामने न आना ..
मैं अब और नहीं बर्दाश्त कर सकता तुम्हारा ये फ़ेक कंसर्न । आज तुम मुझे फ़ेक लग रही हो। तुम्हारी फीलिंग्स भी फ़ेक । सबकुछ फेक और बेमानी है अब।
फराह ने एक लफ्ज़ भी नहीं कहा । वो समर का ये चेहरा पहली बार देख रही थी ।उसे खौफ आ रहा था अब सच में समर को और फेस नहीं कर सकती थी।
समर जाने क्या नहीं अपनी भड़ास उसपर निकालकर चला गया था।
समर के जाने के बाद वो माज़ी में खो गई । क्या ये वही शख्स था ,जो उस पर बेइंतेहा मोहब्बतें लुटाता था । उसकी हर फरमाइश पूरी करता । ज़िंदगी के हर क़दम पर साथ निभाने वाला । उसकी हर मुश्किल में मज़बूत ढाल था वो ।
आज क्यों वो इतनी बदगुमानियों और ग़लतफ़हमियों का शिकार था । क्यों तक़दीर की आज़माइशों ने उसके ऐतमाद को डगमगा दिया था । आज क्यों वो अपना तहफ़्फ़ुज़ उससे छीन लेने पर आमादा था ।
क्या वो नावाक़िफ़ था उसकी बेलौस मोहब्बत से, जिन नज़रों जिस वजूद में उसके लिए तो बेपनाह मोहब्बत थी उन्ही नज़रों को वो अपनी नफरत भरी निगाहों से क्यों देख रहा था । उसने भी तो उसकी चारदीवारी को एक हंसती बस्ती दुनिया में तब्दील करने में कोई कसर न छोड़ी थी
वो भी तो उसकी दुनिया में आने से पहले अपनी सारी अना सारी ख्वाहिशात कहीं दफन कर आयी थी ।और कोई कारनामा तो नहीं किया था उन दोनों ने ही…..
शादी तो होती ही है फिक्स डिपाजिट की तरह जिसमे दो लोग खुद के अरमान , खुद के अंदर तबदीली । और सांझी ख्वाहिशें ही तो डिपाजिट करते चले जाते हैं और तब जाकर वो खुशी और कामयाबी उन्हें हासिल होती है जो एक खूबसूरत घर की तामीर करती है।
फराह अपनी डीप थॉट्स में खोई हुई थी और मंजीत कब से उसके पास आकर खड़ी थी।
फराह उठो ……..फराह मैं हूँ. ……मंजीत देर से उसे पुकार रही थी
.पर जैसे उसने उसे पकड़कर हिलाया तो जैसे वो उन ख्यालों के भंवर से बाहर आई…