day care
फराह कुछ देर के लिए मानो वहीं जम सी गई थी।
ये सब खतरनाक मंजर देखने के बाद फराह को काटो तो खून नहीं।
वो अब और घबरा गई और बदहवासी की हालत में इधर उधर शीनू को तलाशने लगी ।तभी उसने समर को शीनू को गोद में लिए भागते हुए अपनी ही तरफ आते हुए देखा। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था । वो अपनी जगह बुत बनी ही रही थी।
समर बाहर की तरफ ही आ रहा था । अचानक से उसे जैसे नींद से होश आया और वो भी हांफती हुई समर के पीछे भागी थी।
समर उसे देख कर एक पल के लिए चौंका था । तुम यहाँ….!!! तुम यहां कैसे आ गई ।
वो .. वो मेरी छोड़ें ।
ये..ये सब यहां कैसे हुआ । क्या हुआ मेरे शीनू को । मैंने तुम्हे कितनी कॉल्स की .वो एक सांस में बोलती ही चली गई ।
पर समर ने उसे बीच में ही रोक दिया था।
रुको फराह …पहले गाड़ी तक चलो । शीनू बेहोश है , हम एम्बुलेंस का वेट नहीं कर सकते..इसे जितनी जल्दी हो सके लेकर निकलना होगा ।
शीनू का नाम सुनते ही फराह चीख पड़ी थी।
क्या .!!! शीनू कुछ बोल क्यों नही रहा ….वो बस शीनू की तरफ देखती हुई बोलती जा रही थी जिसे समर अपने सीने से चिपकाये बदहवासी में कार की तरफ बढ़ रहा था ।
जैसे ही समर ने कार की पिछली सीट का दरवाज़ा खोला । वो झट से दूसरी तरफ से गाड़ी में बैठ गई और शायान को अपनी गोद में समेट लिया था।
वो बार बार उसकी पेशानी चूमती । कभी उसकी हथेलियां चूमती और समर तेज़ी से गाड़ी लेकर हॉस्पिटल की तरफ निकल गया ।
उसने फिर पूछा ।
समर .. समर .. देखे जरा शीनू रेस्पॉन्ड नहीं कर रहा है । ज़रा तेज़ चलाएं ।
समर के हाथ कांप रहे थे स्टीयरिंग व्हील पर , वो कांपते हुए फराह से कहता है।
वही तो कर रहा हूँ फराह । पर ये ट्रैफिक भी जानलेवा ही है । तुम बस शीनू पर पानी डालो ।उसे जगाने की कोशिश करो । कोशिश करो फराह ।
वो चीख रहा था..उसकी चीख में उसकी तकलीफ भी अयाँ हो रही थी ..जिसे वो नार्मल दिखाने की नाकाम कोशिश में था ।
हॉस्पिटल पहुँचते ही शीनू को इमरजेंसी में एडमिट कर लिया गया । समर बदहवास हुआ डॉक्टर्स के पीछे भाग रहा था । और फराह वहीँ आई सी यु के बाहर खामोश गठरी बनी अपनी ज़िंदगी की सबसे क़ीमती शय को खुद से दूर जाता देख रही थी ।
वो पत्थर हो गई थी ,उसके होंठ लरज़ रहे थे । उन्ही लरज़ते लबों से वो अपनी नन्ही जान की सलामती की दुआएं मांग रही थी ।
थोड़ी देर में समर वापस उसकी तरफ आया था। उसे देखते ही वो हड़बड़ाती हुई उठ खड़ी हुई और उसके क़रीब जाकर देखा तो वो फूट फूटकर रो रहा था ।
क्या हुआ है समर ,मेरे शीनू को । मेरा दिल काबू में नहीं है… । आप कुछ तो बोलें । मेरी तरफ देखो ,आप कुछ बोलते क्यूं नहीं अब । वो उसके दोनों बाज़ू पकड़कर बस चीखती ही जा रही थी ।
समर ने अब धीरे से हकलाते हुए कहा था।
वो बच्चा वो फराह ..वो मेरे ऑफिस कुलीग का था । उसने दो महीने पहले ही उसे उस मनहूस क्रेच में डाला था । अब क्या होगा उनका।
वो बस चार साल का था फराह ,सिर्फ चार साल ।वो नन्ही सी जान चला गया इस दुनिया से ।
तुम.. तुम तो हर दिन जाती थी न वहां ।ये किस क़साईख़ाने में तुम हमारे बच्चे को छोड़ आयी ..तुम कहाँ ग़ाफ़िल रही …तुमने मुझे पहले कुछ क्यों नहीं बताया । कब से तुम बातें छुपाने लगी हो मुझसे । काश कि मुझे कुछ पता होता। मैं .. मैं तो अपनी फैमिली हमारा बच्चा सब कुछ तुमपर छोड़कर बैठा था। ये क्या किया तुमने फराह ।
समर की इन बातों से वो अंदर ही अंदर जल रही थी।
नहीं समर.. प्लीज ।
ये वक़्त नहीं है समर ..इल्ज़ामतराशी का । आप बस शीनू की तरफ देखें.. दूसरे डॉक्टर्स से बात करें । कुछ भी करें…….कही भी जाएँ । मैं अपना सब हार दूंगी ……बस एक दफा मेरा बेटा ठीक हो जाए।
उसकी इस बात पर समर गहरी सांस लेकर बोला।
अब क्या हारना है फराह । हमारी खुशियां और हमारी मुस्कराहट तो तुमने पहले हार ही दीं । मेरा शीनू.. मेरी जान .. फराह .. मैं .. मैं तुम्हे अब कभी माफ़ नहीं करूंगा ।
अगर उसे कुछ हो गया तो मैं तुम्हारी शक्ल नहीं देखूंगा । फिर चली जाना कहीं भी मगर मेरे सामने ना आना ……..हरगिज़ नहीं ।
समर तैश में पता नहीं क्या क्या कह रहा था और फराह तिनका तिनका बिखर रही थी उसके सामने।
नहीं समर ……ये कुफ्र न निकालें अपनी ज़ुबान से । उसे कुछ नहीं होगा …मेरा दिल कहता है मेरा शीनू अच्छा होगा । आपके सौ इलज़ाम अपने सर पे ले लूंगी ।कभी नहीं आउंगी तुम्हारे रास्ते । जितनी लानत मलामत करनी है तुम्हें कर लेना मेरी तुम ।
मैं उफ्फ्फ तक नहीं करूंगी । पर अभी हाथ उठायें समर ..सिर्फ दुआ के लिए । उपरवाले का करम होगा हम पर…… ..ये आज़माइश भी गुज़र जाएगी ।
हाँ फराह दुआ करो ……..की ऐसा ही हो……..वरना तुम अपने सारे रिश्ते खो दोगी ..।
तुम ..तुम मुझे खो दोगी …कहता हुआ वो उसका हाथ झटक कर चला गया ।
और वो बेबसी से उसे जाता देखती रह गई ।
कुछ घंटों में ये खबर सारे शहर में फैल चुकी थी.।.समर के ऑफिस के सारे लोग हॉस्पिटल में इकट्ठा हो गए थे।
समर कभी उनके दरमियान खड़ा तो डॉक्टर्स के पीछे भाग ही रहा था..थोड़ी देर बाद मंजीत भी उसे पूछती हुई हॉस्पिटल आ चुकी थी..
उसे देखते ही फराह के सब्र का बाँध टूट गया और वो उसके गले लग कर ज़ार क़तार बस रोये जा रही थी..।
ऐसे नहीं रोते……..देखो तुम अभी किस हाल में हो……चुप होकर बताओ….डॉक्टर ने क्या कहा.. मेरी तो समर भाई से पूछने की हिम्मत ही नहीं थी ।…..वो इतने लोगों के बीच थे ..तुम बताओ शीनू ठीक तो है न..।
अभी कुछ क्लियर नहीं है… हर दो घंटे में बस उसके नज़दीक जा पा रही हूँ..पर वो है की जागता हे नहीं ..और वो फिर रोने लगी थी।
अच्छा ..अब तुम चुप हो जाओ…..तुमसे नहीं पूछ सकती मैं…लेकिन मैंने वाहे गुरु से कह दिया है
एक ही तो दोस्त है मेरी …वो रोयेगी तो मैं कैसे रहूंगी…. ..देखना रब सब राखेगा……तेरा शीनू तेरी गोद में वापस आएगा ..वैसा ही हँसता खेलता . शरारतें करता ….
कहती हुई वो उसके आंसू पोंछती जा रही थी …. इस तरह वो पूरी रात एक क़यामत के तरह गुज़री उनपर…….डॉक्टर्स ने बारह घंटे का वक़्त दिया था ..जो क्रिटिकल थे ।
अब वो क्रिटिकल ऑवर्स तो बीत चुके थे..सुबह का सूरज निकल चुका था …मगर उनके घर का उजाला तो मद्धिम हो गया था ।
जैसे ही डॉक्टर्स बाहर आये ..वो दोनों दौड़कर उनके पास पहुंचे थे ।