second child
समर को अब औऱ ज्यादा देर नहीं लगी फराह के इस Cold Response को फील करने में । कुछ देर तक तो वो अनमने ढंग से खुद से लिपटी फराह के साथ लेटा रहा पर उसका रियेक्शन समझते ही वो धीरे से उसे खुद से अलग कर देता है।
उसके चेहरे का रंग बदल रहा था।
क्या हुआ ..फराह ?? ।
इतनी बड़ी न्यूज़ ..और तुम ऐसे Dull रियेक्ट कर रही हो..!!
क्या तुम्हे खुशी नहीं हुई इतनी बड़ी बात से या फिर कोई Complication हो गई है तुम्हें । मैं… मैं कल ही फिर से तुम्हारा सारा चेकअप कराता हूँ ।
समर की बात सुनते ही फराह एकदम से जैसे नींद से जागी थी।
नहीं नही ।
हरगिज़ नहीं .. ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं …बस थोड़ी वीकनेस है ..ठीक हो जाएगी ..पर मैं..
आगे कहते कहते वो रूक सी जाती है।
समर के चेहरे पर अब फिक्र की लकीरें नुमाया होने लगी थी। वो फराह का हाथ अब अपने हाथ में ले लेता है।
क्या पर ..कुछ कहो भी । मुझे डर लग रहा है। देर से फील कर रहा हूं । इतनी बड़ी न्यूज है मगर तुम्हें तो कोई एक्साइटमेंट ही नहीं। जाने कहां खोई हुई हो तुम।
समर की इस बात पर फराह एकदम से बोल पड़ती है।
दरअसल मैं अभी एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी ये सब इतना अचानक हो गया । हमें एहतियात करना था न समर ।
ये सुनते ही समर का हाथ एकदम से फराह के हाथ से छूट जाता है।
ये ..ये क्या नॉनसेंस कह रही हो तुम !!!!
अब से पहले तुमने पहले कभी मना तो नहीं किया और और..
ये तो अल्लाह की मर्ज़ी है । उसकी नेमत है और तुम इससे नाशुक्री कर रही हो ।
फराह अब धीरे धीरे पीछे हटने लगती है ।
नहीं समर आप समझ क्यूं नहीं रहे । मैं कोई नाशुक्री नहीं हूँ वो तो बस अभी मुझे इन झमेलों में नहीं पड़ना । मैं तो अभी दोबारा से अपने करियर पर फोकस कर रही थी । शीनू के स्कूल ज्वाइन करने के बाद किसी तरह सब मैनेज किया है अभी तक। बट अब सेकंड चाइल्ड के बाद सबकुछ पहले जैसे नही रह सकेगा।
अभी तो अच्छा खासा ग्रोइंग फेज है मेरा । अब इन सब के बाद फिर से मैं करियर में चार पांच साल पीछे हो जाउंगी ।
और फिर से वही सारी स्ट्रगल करनी होगी और पता नहीं इस दफा क्या मेरी सेहत और घर के हालात इजाज़त देंगे की मैं कुछ कर सकूँगी कभी अपने लिए। .
मैं सच कह रही हूँ समर ।अभी मुझसे ये सब नहीं होगा ।
फराह की इन बातों से समर की सारी खुशी काफूर हो चुकी थी । उसे ग़ुस्सा आ रहा था ।पर उसने खुद पर काबू रखा था। और सिचुएशन संभालने की कोशिश करता है।
देखो फराह । बात इतनी ब़ड़ी नहीं है बस ये न्यूज़ इतनी अचानक से मिली है की तुम एक्सेप्ट नहीं कर पा रही हो । एक दो महीने में सब नार्मल हो जाएगा ट्रस्ट मी यार।
पर फराह तो अब कुछ औऱ ही कह देती है।
बट.. क्या हम अभी आगे बढ सकते हैं ।
ये ये अभी सही होगा ..क्या …….मैं तो कुछ और ही सोच रही थी ..देखो तुम नाराज़ नहीं होना …ज़िन्दगी बहुत बड़ी होती है ..दोबारा ये सब मिल जाता है पर कामयाबी दोबारा दस्तक नहीं देती ..और इस दफा मैं कुछ हासिल करने की पोजीशन में आयी हूँ तो ये सब हो गया ।
फराह की इस बात पर समर अब डिस्टर्ब हो गया था ।
व्हॉट.. ये क्या कहना चाहती हो तुम । साफ़ साफ़ कहो । मेरे सब्र का और इम्तेहान मत लो ।अगर दिमाग़ में कोई उल्टी सीधी बात आई है तो फ़ौरन निकाल दो और अपना ज़ेहन इन गंदी चीज़ों से खाली कर लो । समझी तुम।
वरना ..सब बिगड़ जाएगा । समर का लहजा अब बदल रहा था।
पर फराह ने भी तेवर बदल लिए थे।
वरना क्या .. तुम मुझे मजबूर नहीं कर सकते ..ये मेरी ज़िंदगी है मेरा फैसला भी मायने रखता है ।
समर अब समझ रहा था फराह जो कहना चाह रही थी।
हां… है ये तुम्हारी ज़िंदगी ।पर हमारी खुशियां और फीलिंग्स मुख्तलिफ नहीं । हमारे इमोशंस ,उनका क्या। यही तो रिश्ता है ..तुम और मैं ,हमारी औलाद और हमारा घर । एक कम्पलीट फैमिली होन जा रही है यार। तुम सोचो ।
ये कोई तुम्हारी कार नहीं की तुम्हारी अपनी होगी मेरी अपनी । न चाहते हुए उसकी ज़ुबान से वो बात फिसल गई जिसका इस मसले से दूर दूर तलक तक कोई वास्ता नहीं था । मगर शायद ये बात समर के दिलो दिमाग मे कहीं फांस बन कर चुभी हुई थी ।तभी तो वो समझ भी नही सका कि ये सडनली उसकी जुबान से क्या निकल गया।
पर फराह को अपनी दलील देने के लिए एक मज़बूत वजह मिल गयी ।
जिसके बाद समर ने खामोशी इख्तियार कर ली और बात को वहीँ रोक दिया था।
रात बीत गई मगर दोनों में कोई बात चीत नहीं हुई ….इस दफा दोनों ही तरफ खामोशी थी ।
अगले रोज़ फराह ने ही खामोशी तोड़ी ।
समर सुनें…आज शीनू के स्कूल में कह दें की वो घर पर ड्राप करें ।
मैं दो तीन दिन घर पर ही हूँ..वैसे भी कल आपने जो कहा उसके बाद देखती हूँ.
कोई दूसरा डे केयर शीनू के लिए ।
फराह की ये बात सुनकर समर को इत्मीनान भी हुआ और वो एक लम्हे के लिए तकलीफ से भी गुजर गया। उसने तभी पलटकर तपाक से फराह से कहा ।
वेल सेड फराह… एक औलाद के लिए तो तुम एक ज़र्रे भर का भी रिस्क नहीं लेना चाहती हो और बकौल तुम्हारे हमारा सेकंड चाइल्ड जो आसमानी रूह अभी आयी नहीं उसके लिए इतनी बेअतनाई ।ये तुम्हारी कैसी मोहब्बत है फराह ।
ये बात सुनकर वो अंदर से तिलमिला उठी और वापस अपने रूम में चली गई।
समर भी शीनू का हाथ पकड़कर बाहर निकल गया ।सारा दिन वो इसी कश्मकश में रही की अब क्या करे… क़दम आगे बढ़ाये या वापस मोड़ ले ।
तभी अचानक से मंजीत की कॉल आ गई ।
क्या हुआ फराह डिअर…कहाँ ग़ायब हो ??..तुम्हारी तबियत इतनी कैसे खराब हो गई !!
हम्म ……….दो दिन गुजरने के बाद अब हाल पूछ रही हो. फराह ने शिकायती अंदाज़ में कहा था।
नहीं यार ..ऐसी बात नहीं ..पहले दिन काम बहुत था ..मुझे लगा तुम्हार कोई पर्सनल काम होगा ..ऐसा कैसे होगा ………दो दिन तक तुम्हारे हाथ का बना खाना न मिला तो ठीक से लंच ही नहीं कर सकी ..
हम्म……तो आदत मेरी नहीं……. सिर्फ ज़ुबान के ज़ायके से जुड़ी है क्या हमारी दोस्ती !!
नहीं बाबा ..अभी आती हूँ ..तुम्हारी तरफ ..अब ये शिकायत मेरे सामने ही करना ..बस ऑफिस से निकल रही हूँ ..एक घंटे में मिलती हूँ..तुम घर पर हो न ..
ठीक है आ जाओ फिर बताती हूँ ..
कहकर फराह उसका इंतज़ार करने लगी और साथ ही उसके लिए कुछ खाने का भी बना लिया …
घंटे भर बाद वो दोनों फराह की बालकनी में बैठी थीं..
मंजीत ने चाय के साथ पकोड़े लेते हुए कहा ..
क्या मज़े के पकोड़े बनाये हैं तुमने फराह ..रियली तुम एक कम्पलीट वुमन हो… ब्यूटी भी ..ब्रेन भी ..और हाथों में इतना बेहतरीन ज़ायका भी ..ऐसा कॉमबिनेशन हमेशा नहीं पॉसिबल होता।
हम्म रहने भी दो…….ऐसा कुछ नहीं ।मैं क्या हूँ कैसी हूँ .मुझे खुद से बेहतर कौन जान सकता है ..उसकी आवाज़ में तकलीफ थी जिसे मंजीत ने महसूस कर लिया था।
क्या हुआ डिअर सब ठीक तो है …तुम तो जानती हो न तुमसे कुछ पूछने में डरती हूँ..तुम खुद ही बता दो ना
मैंने उसी दिन तुमसे कहा की हमारे दरमियान कोई फॉर्मेलिटी नहीं ..फिर भी ..
फराह ने उसे बीच में टोका था..
अच्छा अब बताओ …………………क्यों सारे जहाँ की उदासी अपने चेहरे में समाये हुए हो..
वो एक्चुअली मैं …मैं ..वो ..वो …मैं.प्रेग्नेंट हूँ..
व्हाट ????
….और वो खुशी से उछल पड़ी.। इतनी बिग ब्रेकिंग न्यूज ,और तुम्हारा ये खूबसूरत फेस लटका क्यूं हुआ है। मंजीत ने मुस्कुराते हुए कहा तब भी फराह का फेस बुझा बुझा सा ही था।
और फिर धीरे धीरे फराह ने उसे सारी सिचुएशन बताई और अपने दिल के अंदेशे ज़ाहिर किये तो मंजीत भी खामोश हो गई ।
अब तुम ही बताओ ..मैं क्या करूँ मंजीत…….समर तो बहुत अपसेट हैं..वो मेरे किसी भी रॉन्ग मूव पर हरगिज़ राज़ी नहीं होंगे ..और मैं आगे बढ़ना नहीं चाहती ।
मंजीत भी अजीब उधेड़बुन में थी ..
मैं क्या कहूं…. ..फराह …….ये बहुत ही पर्सनल इशू है ..मैं क्या कोई भी इस मामले में तुम्हारी हेल्प नहीं कर सकता ..मैं कैसे तुम्हे अपना ओपिनियन दूँ..दोनों ही स्टेप मुश्किल हैं तुम्हारे लिए और ये तुम पर ही डिपेंड करता है की तुम कैसे हैंडल करती हो…
.बड़ा नाज़ुक मामला है ..यार …हम दोस्तों की भी लिमिट्स होती हैं….मेरी मानो तो तुम अपने मियाँ और अपनी फॅमिली को भरोसे में लेकर ही कुछ करना …..देखना सब अगर साथ देंगे तो चाहे आगे बढ़ो या पीछे हटो ..पर तुम अकेली नहीं होगी
नहीं मंजीत .. ..क़दम बढे हुए तो पहले ही से हैं ……अब तो पीछे लेने का मसला है .जिसपर पता नहीं मेरे साथ कौन खड़ा होगा …वैसे भी अभी ये बात फॅमिली तक गई ही नहीं ।
तो फिर ठीक है … जो सोचना है जल्दी सोचो …और मेरे लिए कोई हुक्म है तो कहो ..मैं हाज़िर हूँ…।
वक़्त मिला तो कल आउंगी नही तो अगले रोज़ ..वैसे तुम कब ज्वाइन करोगी .. बस दो चार रोज़ में..अभी कुछ टेस्ट होने हैं,..और फिर थोड़ा रेस्ट का भी कहा है
ओके बाय डियर.. फिर मिलते हैं..कहकर मंजीत चली गई ।
और फराह फिर से अपने उन्ही सवालों और अंदेशों में उलझी रही ।