Abortion
देर शाम 7 बजे।
मंजीत के जाने के कुछ ही देर बाद समर भी घर में दाख़िल हुआ । उसके हाथ में मेडिसिन्स और ढेर सारे फ्रूट्स भी थे ।वो बस उसे देख कर मुस्कुराया था मगर फराह ने कोई रीएक्शन नहीं दिया ।
वो चुपचाप किचन में आ गई थी ,फिर समर दोबारा से उसके पास आया और बोला ।
फराह मैंने कल तुम्हारे टेस्ट के लिए टाइम ले लिया है । कुछ मेडिसिन्स भी हैं..जो तुम्हें लेनी हैं ।फ्री होकर देख लेना ।
जी बेहतर ,फराह ने बस हाँ में सर हिलाया ।
दोनों ही खामोशी से रहे ।वैसे भी समर खुद से अलर्ट था । वो नहीं चाहता था की अपनी किसी बात से फराह को इस वक़्त हर्ट करे । वो बस किसी तरह फराह के माइंड में चल रहे निगेटिव थॉटस को हटाना चाह रहा था।
अगले रोज़ समर उसे खुद सारे टेस्ट कराने लेकर गया । सारी फॉरमैलिटीज पूरी करने के बाद ही वो अपने ऑफिस के लिए निकला । फराह भी खामोशी से बिना किसी ऐतराज़ उसके साथ साथ चलती रही । फिर भी दोनों के बीच दूरी बढ़ चुकी थी और उनके दरमियान बस मिनिमम कॉंटैक्ट ही हो पा रहा था। इसी तरह एक पूरा हफ्ता गुज़र गया । अब फराह पहले से बेहतर थी और उसने दोबारा ऑफिस ज्वाइन कर लिया था।
हालांकि उसे कुछ हेल्थ ईशू और First Trimester के कॉम्पलिकेंशस हो ही रहे थे लगातार मगर अभी तो एक लंबा अरसा इसी तरह निकालना था सो वह पूरी हिम्मत और जोश से फिर से अपने पुराने रूटीन में लग गई । समर भी अब अपने अंदेशो से मुतमईन हो गया । पर फराह के अंदर जो उथल पुथल मची थी वो अब तक थमी नहीं थी ।
अच्छा किया फराह तुमने । जो ऑफिस ज्वाइन कर लिया ।इतने दिन बाद तुम्हे ऑफिस में देखकर मैं बहुत खुश हूँ ।और क्या सोचा ।
मंजीत ने उसके नज़दीक आकर बैठते हुए पूछा था।
हम्म …अभी वेट कर रही हूँ ।कुछ वक़्त ले रही हूँ, उसके बाद ही प्लॉन करूंगी।
क्या मतलब !!..तुम अभी तक कन्फ्यूज्ड हो..ऐसे नहीं होता । माना की तुम इन फैमिली मैटर्स में ज़्यादा समझ रखती हो ,पर अगर अब तक तुम अपने डाउट्स में ही रहोगी तो ये बिलकुल सही नहीं ।बाद में हेल्थ इशू हो जाएगा तुम्हारे साथ ।
हाँ ..इसीलिए तो देखती हूँ । अभी जस्ट वेट ऐंड वाच में हूँ । फराह की बात सुनकर मंजीत ने फिर टॉपिक चेंज कर दिया था।
फिर उसके बाद दोनों में इस टॉपिक पर कोई बात नही हुई।
दो दिन बाद।
आज की रात एक हंगामा तो हुआ था । दरअसल समर कुछ पेपर्स ढूंढ रहा था फराह के वार्डरॉब में ,शायद कोई डॉक्यूमेंट जो उसके पास नहीं था ।
तभी ढूंढते हुए उसके हाथ में एक एनवेलप आ गया जिसमे कुछ मेडिसिन्स थी । उसने बाहर आकर देखा। ये वो मेडिसिन्स नहीं थी जो वो फराह के लिए लाया था । उसने दोबारा चेक किया तो उसे माजरा समझ में आ गया ।
वो ग़ुस्से और रंज के आलम में था ।
जैसे ही उसकी नज़र सामने से आती फराह पर पड़ी..उसने वो एनवेलप उसे दिखलाया ।
फराह जान गई थी की समर सब समझ चुका था । वो अपनी एक्सप्लनेशन देना चाहती थी .पर समर तो कुछ सुनंने को तैयार ही नहीं था ।
तो तुम ये कारनामा करनेवाली हो !!!!
या या शायद कर चुकी हो ..है ना !!!! वो कहते कहते लरज रहा था।
तुम्हे किसने ये हक़ दिया था की तुम ये क़यामत कर गुज़री । आखिर तुमने Abortion का सोचा तो कैसे। कैसे ये गुनाह कर सकती हो तुम तुमने एक लम्हे के लिए मेरा नही सोचा । हमारा नहीं सोचा।
समर .. please calm down.. आप आप सुनें तो मेरी बात । जैसा आप देख रहे है, वैसा कुछ नहीं हुआ है ।
कहते हुए फराह अब हकलाने लगी थी। हाँ ..ये सच है मैंने इरादा तो किया था और ये मेडिसिंस लाई भी थी । पर यक़ीन जाने मेरी हिम्मत नहीं हुई । फराह आगे कुछ और कहती इससे पहले समर उसे रोक चुका था।
नो नो … यक़ीन …नहीं फराह । तुमने .. तुमने तो फरेब किया है मेरे साथ , हमारे इस पाकीजा रिश्ते के साथ । अब फराह अपने आप को रोक नहीं पाई ।
ऐसा कुछ भी नहीं किया है मैंने समर । आप ये Abortion और ये ऑल फॉल ऐसी वैसी बातें मत करिए प्लीज । शीनू की क़सम समर…और मैं क्या कहूं ।कहते हुए वो चीख पड़ी थी।
शीनू का नाम आते ही समर खामोश हो गया । उसने एक ठंडी सांस ली । कुछ देर के लिए दोनों ही अपनी जगह बुत बनकर खड़े ही रहे थे और फिर एक बार समर ने ही सवाल किया था।
तो …तो फिर ये सब क्या है । तुम जानती तो हो न कि ये मेडिसिंस किस पर्पस की हैं तो फिर Abortion pills, ये मेडिसिंस तुम्हारे वार्डरॉब में इतनी सीक्रेटली क्यूं क्यों रखी हुई थी ???
मुझे तो ये नाम लेने में जुबान कट रही है मेरी । पर तुम्हें तो कोई फर्क ही नही पड़ता।
जभी तो तुम अभी ये नाकाबिले माफी गुनाह करनेवाली थी । और शायद अगर मेरी नज़र नहीं पड़ती तो तुम ये घिनौना जुर्म कर डालती ,जिसकी न तुम्हे शर्मिंदगी होती और न ही अफ़सोस ।
बोलो फराह ..ऑनसर मी। चुप क्यूं हो। आखिर ये मेडिसिंस तुम्हारे वॉर्डरोब में कैसे और क्यूं आई ।
समर के इस सवाल का फराह के पास कोई जस्टिफिकेशन नहीं था । उसने आखिरकार कुबूल कर ही लिया।
हाँ समर ….सोचा तो यही था । ये pills लाई है मैने । बीते कई दिनों से इसी कशमकश में रह रही हूं । पर अब ऐसा कुछ नही करना मुझे । आगे जो होगा देखा जाएगा । और आज अभी आपका ये सीन देखकर तो मेरे होश वापस आ गए , अभी जब आपका ये हाल है तो आइंदा आपका ग़ुस्सा और नफरत झेलने की बर्दाश्त नहीं है मुझमे । फिलहाल के लिए तो मेरा सच यही है।
आप की मर्ज़ी आप जो चाहें राय क़ायम करें..अब मैं और इस टॉपिक पर पर आपसे कोई बहस नहीं करूंगी । कहकर वो सोने चली गई थी।
पर समर के दिल में वो शक पनप चुका था और वो उसे लेकर हमेशा फिक्रमंद रहने लगा ..की कहीं फराह फिर से नेगेटिव होकर वो ग़लती सच में न कर दे।
कुछ दिन बाद उसकी तबियत दोबारा से खराब होने लगी ।उसने डॉक्टर को दिखाया तो कुछ कम्प्लीकेशन जरूर हुई थी । पर वो मामूली थी ..इसलिए उसने समर को बताना ज़रूरी नहीं समझा .। वरना वो फिर से उसे ऑफिस जाने से मना कर देता ।
उसे इसी बात का डर था हो गया था समर से । इसलिए उसने उसपर कुछ ज़ाहिर ही नहीं किया । और बात इतनी बड़ी भी नहीं थी की उसके लिए कोई मसला बनती । सो वो थोड़ी बेफिक्र और लापरवाह हो गई थी । मगर इस दरमियान एक परेशानी दिख रही थी उसे जिसे वो ना चाहते हुए भी नज़रअंदाज़ कर रही थी ।
शीनू अब पहले से भी ज़्यादा सुस्त रहता और न ढंग से स्टडीज कर रहा था न स्पोर्ट्स .. और अब तो स्कूल से भी उसकी कंपलेंट आने लगी थीं कि वो एक्टिविटीज में बहुत कम पॉरटिसिपेट करता है। हमेशा डल सा रहता है।
उसने एक दफा समर से भी डिसकस किया .मगर उसने कहा की होता है कभी कभी बच्चे ज़रा अलग बिहेव करने लगते हैं..एक ही रूटीन से जब हम बड़े तंग आ जाते हैं तो बच्चे तो आखिर बच्चे ही हैं ।
धीरे धीरे पूरे दो महीने और गुज़र गए । पर न फराह की तबियत बेहतर हुई न शीनू में ही कोई बदलाव नज़र आया ।इसके उलट वो अब और ज़्यादा सुस्त और चिड़चिड़ा रहने लगा । फराह ने उस दिन तय कर लिया की अगले ही दिन समर के साथ शीनू को लेकर किसी डॉक्टर से मिलेगी ।और साथ ही उसने एक दो दूसरे डे- केयर में बात भी कर ली थी ।
उसे कुछ तो अंदाजा हो रहा था की शीनू का मसला क्रेच से ही जुड़ा था ..मगर क़ुदरत को कुछ और ही मंज़ूर था ।