It hurts...
अगली सुबह समर फिर आया था ..फराह के कुछ कपड़े और फ्रूट्स लेकर ..उसने एक तरफ कोने में सब चीज़ें रख दीं और खुद खामोशी से बैठा रहा ।
मंजीत कुछ देर के लिए घर गई थी । वो पिछले दिन से लगातार हॉस्पिटल में ही रूकी थी । सो उसने समर को थोड़ा रुकने का कहकर खुद चेंज करने चली गयी थी ।
समर तो जैसे बुत बना हुआ था । उसने ना फराह का ही कोई हाल पूछा और न अपना कुछ बताया । वो बस इधर उधर देखकर टाइमपास कर रहा था। इस वक्त उसे फराह को फेस करने का ,उससे बात करने का बिल्कुल मूड नहीं था। वो गुजरे दिन के हादसे की कड़वाहट अब भी अपने वजूद में लिए घूम रहा था।
पर फराह को तो फ़िक्र हो रही थी शीनू छोटा था ।उसने कई सवाल किये होंगे , समर ने कैसे मैनेज किया होगा । वो बार बार समर की तरफ देख रही थी कि वो कुछ बोलेगा मगर समर तो अपनी जगह सर झुकाए फ्रीज हुआ बैठा ही रहा। आखिरकार उससे रहा न गया और उसने समर की तरफ देखते हुए कहा ।
शीनू ठीक तो है न …….वो ज्यादा परेशान तो नहीं हुआ ।
समर ने अब अनमने ढंग से उसे टालने की कोशिश की थी।
हम्म थोड़ा सा ..मैंने कह दिया है उसे कि तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है । हॉस्पिटल में रेस्ट कर रही हो । और और तुम्हे तो मुश्किल हुई होगी ……मीना आयी थी न !!
फराह की इस लास्ट लाइन पर समर बिदक गया ।
ये क्या फॅमिली कोर्ट लगाकर बैठ गयी हो तुम । हॉस्पिटल है ये हमारा घर नही । चुपचाप से रेस्ट करो ।तुम नहीं रहोगी तो क्या घर नहीं चलेगा । पता नहीं कितनी खुशफहमियां पाल रखीं हैं तुमने अपने हवाले से । उसके इस रवैये से फराह शॉक्ड हो गई थी । इतने सालों में समर ने इस लहजे में बात नहीं की थी, चाहे कितनी लड़ाइयां हुई हों उनके दरमियान ।
और न ही उसकी नज़रों में फराह की दी हुई वजाहतों की ही कोई गुंजाइश बची थी । वो तो वाक़ई में उसके ऊपर लगाए संगीन इल्ज़ामों को लेकर बेहद संजीदा था । और अपनी किसी न किसी बात से उसे दर्द दे रहा था ।
समर के इस मिसबिहेवियर के बाद फराह के अंदर हिम्मत नहीं बची थी कि वो कुछ और पूछती।
उसने फिर कोई बात नहीं की और दूसरी तरफ मुंह छुपाकर रोने लगी थी।
उसकी सिसकियाँ वो सुन रहा था पर आज वो भी बेअसर थीं ।
दोनों ही तरफ दिल ज़ख़्मी हुए थे मगर एक तरफ जिस्म के हिस्से को खोने का दर्द था तो दूसरी तरफ इल्ज़ाम ।
दो दिन बाद वो घर वापस आ गई थी मगर वो काफी कमज़ोर हो गई थी ।घर का छोटा मोटा काम भी बड़ी मुश्किल से कर पाती थी ।उसने एक महीने की लीव अप्लाई कर दी थी और समर से कहा भी की जब तक वो घर पर है शीनू के स्कूल में घर पर ही ड्रॉप करने का ही कह दे..पर समर ने साफ़ इंकार कर दिया था।
देखो अभी तुम पहले खुद तो बेटर हो जाओ । दो तीन रोज़ के बाद शीनू घर पर ही आ जाएगा तब तक तुम रेस्ट करो ,मैं बार बार ऑफिस से लीव नहीं ले सकता ।इसलिए पहले ठीक हो जाओ फिर जो मर्ज़ी आए करना ।
समर ने फिर से रूखे अंदाज में कहा तो फराह से रहा नहीं गया ।
ये कैसी बात कर रहे हो आप समर । मैंने हॉस्पिटल में भी तुम्हारी बदलिहाज़ी बर्दाश्त की । मगर अब बस करें । मेरे अंदर और और बर्दाश्त करने की स्ट्रेंथ नहीं बची है।
It hurts me..samar.dont do this to me..
प्लीज इतनी नफरत से तो बात न करें ।
फराह कुछ और कहती तब तक समर भी कहां पीछे रहनेवाला था ।
तुमसे बात करना कौन चाहता है अब । वो तो मजबूरी है वरना । खैर रहने दो।
अब फराह समर की ये जहर बुझी बातें फेस नहीं कर पा रही थी।
ये कैसे सख्त अलफ़ाज़ से आप बात कर रहे हैं । इतने सालों के हमारे रिश्ते में मैं कभी ऐसे अलफ़ाज़ की आदी नहीं रही हूँ । वो भी आपकी ज़ुबान से .इतनी कड़वाहट के साथ । ऐसे कैसे सब नॉरमल हो पाएगा हम दोनों के दरमियान।
वो आगे कुछ और कहती मगर समर तो आज भरा पड़ा था।
क्या कहा तुमने नॉरमल । अब तो यही नॉरमल है और इसकी आदत डाल लो तुम। क्यूंकी फिलहाल आइंदा मुस्तक़बिल में न मेरे अलफ़ाज़ बदलने वाले हैं । और न मेरी ज़ुबान से कभी शहद टपकेगा तुम्हारे लिए। मेरे इस बदले हुए रवैये और इन सख्त लफ़्ज़ों , मेरी कड़वी ज़ुबान की वाहिद वजह तुम हो । और मैं खुद नही जानता कि ऐसा कब तक चलेगा।
और वो तेज़ी से उसके सामने से निकल गया ।
और वो मुजरिम बनी बस उसे देखती रह गयी ।
पर उसके बाद जो तूफ़ान उन दोनों की ज़िंदगी में नाज़िल हुआ उसने अपनी ज़द में उनके रिश्ते को ही समेट लिया ।
अगले दिन वो घर पर अकेली थी ..उसे काफी बेचैनी थी ..और समर पर खासा ग़ुस्सा भी आ रहा था ..उसने कहा भी था की शीनू को घर ड्राप करने का ही कह दे । मगर वो तो अपनी ही जिद पर अड़ा हुआ था। और उसने दो दिन के लिए टाल दिया था । पता नहीं क्यूं वो आज बहुत परेशान हो रही थी उसके लिये..अचानक से बुरे ख्याल उसके मन में हौल रहे थे । उसे लगा हादसे की वजह से अब उसे वहम होने लगे हैं।
मगर तभी अचानक उसके फ़ोन पर एक कॉल आई ..
काल शीनू के क्रेच से आई थी..उसे फ़ौरन वहां आने को कहा गया था । वो बार बार पूछती रही शीनू के बारे में मगर दूसरी साइड से लाइन डिसकनेक्ट हो गई थी। उसने बिना एक पल गवांये समर को कॉल की पर उसका नंबर बिजी आ रहा था ।
वो आनन-फानन में उसी हालत में घर से निकल गई ।
शीनू के डे – केयर में पहुंचते ही जो दर्दनाक मंज़र उसके सामने पसरा था उसे देखकर उसके क़दमों तले ज़मीन निकल गई थी । सारे क्रेच में अफरा तफरी का माहौल था ।
कई सारे पेरेंट्स अपने बच्चो को गोद में लिए इधर उधर भाग रहे थे । कुछ बच्चे बेहोशी की हालत में थे । वो किसी तरह हिम्मत जुटाकर क्रेच में अंदर दाखिल हुई । उसकी नज़रेँ शीनू को ढून्ढ रही थी तभी उसका जिस खौफनाक सच से सामना हुआ उसे देख कर वो कुछ पल के लिए हिल गयी थी ।
वहीँ पास में एक बच्चे को गोद में लिए उसके माँ बाप बिलख रहे थे ……..और पुलिस वाले भी मौजूद थे
वो बच्चा अब ज़िंदा नहीं था । ड्रग्स ओवरडोज़ ने उसकी जान ले ली थी और ये सिलसिला कई महीनो से उस जगह चल रहा था । आज स्टाफ चेंज हुआ था वहां का । जिसकी ग़लती से ड्रग्स ओवरडोज़ का मामला सामने आया था ।
जिसकी वजह से कई बच्चे बेहोश थे और कुछ की सिचुएशन ज़्यादा खराब थी । और इन सबके दरमियान एक मासूम ज़िन्दगी उन लोगों के शैतानी दिमाग़ का शिकार हुई थी ।