Miscarriage
चार दिन बाद।
उस शाम ऑफिस से निकलते वक़्त लिफ्ट अचानक खराब हो गई । और काफी स्ट्रगल के बाद फराह औऱ उन तीन लड़कियों को साथ बाहर निकाला गया जो काफी देर से लिफ्ट में फँसी हुई थी ।
फराह ऑफिस स्टॉफ की हेल्प से किसी तरह बाहर आ तो गई थी मगर वो अब तकलीफ में थी।
बाहर आने के बाद उसे severe abdomen pain महसूस हुआ और वो बेहोश हो गई । पास ही खड़ी मंजीत और ऑफिस स्टाफ ने उसे जल्दी जल्दी हॉस्पिटल पहुंचाया था मगर तब तक फराह की तबीयत कापी बिगड़ गई थी।
हॉस्पिटल आने के घंटे भर बाद ही उसे वो मनहूस खबर मिली जिसका उसने अब इतने महीने बाद शक शुभा भी नहीं किया था ।
फराह अब होश में थी दर्द से बेहाल और गमजदा।
वो ज़ार क़तार रोये जा रही थी । मंजीत ने कुछ देर पहले ही समर को इन्फॉर्म कर दिया था ।
ये सब क्या हो गया मंजीत । ये कैसी कयामत गिरी मुझपर । मैंने ऐसा तो नहीं सोचा था ।ये मुझे उस गुनाह की सज़ा मिल गयी जो मैंने कभी करने का सोचा था ।
समर मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे , तुम देखना वो कितना नाराज़ होंगे । सिसकते सिसकते वो कह रही थी अपनी लरजती जुबान से जो उसका साथ भी नहीं दे रही थी।
मंजीत भी उसके साथ रोते रोते उसे संभालने की कोशिश करती है।
अभी तुम्हारी कंडीशन ऐसी नहीं हे की ये सब सोचो । जो होना था वो तुम पर बीत कर गुज़र चुका है ।होनी को आकर गुज़रना ही होता है । ये ना हमारे कहने से आती है और ना ही इसे रोकना हमारे बस में है ।
और ये तुम कैसी बात कर रही हो । कोई गुनाह या पाप वाप नहीं हुआ है तुमसे । तुम्हारा मिसकैरेज हुआ है ..एबॉर्शन नहीं !!
तुम खुद को क़ुसूरवार न समझो । इतना ज्यादा गिल्ट फील करोगी तो और ज़्यादा तकलीफ होगी ।
मगर मंजीत की इन बातों का भी उसपर कोई असर नहीं हुआ..वो और फूट फूट कर रोने लगी ।
इतने में समर भी कमरे में दाखिल हुआ जिसे देखते ही मंजीत फौरन से सर हिलाते हुए कमरे से बाहर निकल आयी ।
समर को देखते ही वो अपने दोनों हाथों से चेहरा छुपाकर बेसाख्ता रोने लगी ।
उसका यूँ ज़ार क़तार रोना देखकर ही समर का हौसला ख़त्म हो गया और वो धड़ाम से पास रखी चेयर पर सर पकड़कर बैठ गया ।
समर, हमारा बच्चा …कहकर वो और रोने लगी ।
मगर समर तो ग़ुस्से से चीख पड़ा ।
कौन सा बच्चा ……..और किसका फराह । तुमने तो कभी चाहा ही नहीं था की वो दुनिया पर आये ।और देखो क़ुदरत को ये इतना नागवार गुज़रा की उसने हमें ये नेमत बख़्शने के क़ाबिल भी न समझा ।
तुम तो यही चाहती थी न फिर अब क्यों रोती हो । मेरे सामने फिजूल ये सब ड्रामा मत करो । तुम्हारे आंसू मुझे ज़हर लग रहे हैं फराह । मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता ।
कहते हुए वो भी फूट फूट कर रोने लगता है। चंद लस्हो में वो सारे ख्वाब टूट गए थे जो वो लास्ट कुछ महीनों से अपनी फैमिली के लिए देख रहा था। उसे दर्द था,तकलीफ थी मगर था सबसे ज्यादा तो गुस्सा फराह के लिए। वो तो अब उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था।
और फराह तो बस हिचकियां लेते हुए समर को अपनी गवाही दे रही थी।
ऐसा न कहें समर ..ये इलज़ाम आयेद न करें मुझ पर, कसम से मैं मर जाउंगी । मैंने कुछ भी नहीं किया । मैं तो आज उस लिफ्ट में घुटन से मर ही जाती। पता नहीं ये सब कैसे हुआ । क्या हो गया है आपको । आप मुझ पर यक़ीन क्यों नहीं कर रहे ।
वो दर्द और तकलीफ़ में थी, पर जो तकलीफ़ समर की बातों से उसे हुई थी , उसकी शिद्दत कहीं ज़्यादा थी ।
मगर समर पर तो जैसे किसी बात का असर ही नहीं हुआ था । उसने पलटकर देखा तक नहीं था उसकी तरफ जो दर्द और गम से निढाल पड़ी थी ।
वो उसकी उस ग़लती की सज़ा मुक़र्रर कर चुका था जो उसने कभी की ही नहीं थी । वो बिना कुछ कहे उसे पछतावे की आग में जलता छोड़ यूँ ही निकल गया ।
काफी देर बाद वो जब डॉक्टर से मिलकर दोबारा कमरे में गया तो फराह खामोश लेटी थी ।रोते रोते अब तो उसकी आँखें सूज गई थी।
पर फिर भी एक लम्हे के लिए उसे उस पर हमदर्दी नहीं आई.जो उसकी तरफ आस भरी नज़रों से देख रही थी ।
दोनों को यूँ खामोश देख मंजीत ने ही बात शुरू की जो समर के रूम से जाने के कुछ देर बाद ही वो फिर से फराह के पास आकर बैठी थी।
अपने डॉक्टर से बात कर ली समर भाई ! मुझे भी उन्होंने कहा है के दो दिन तो रखेंगे वो फराह को यहीं ऑबजर्वेशन में ।
समर उसकी बात सुनकर थोड़ा सा झेंप सा गया था।
हाँ वो अभी अभी बताया है । मैं निकलता हूँ थोड़ी देर में । शीनू को तो पता भी नहीं..वो अभी क्रेच में ही है पहले जाकर उसे यहां लेकर आता हूँ ।
शीनू का ज़िक्र आते ही फराह परेशान हो गई थी।
नहीं नहीं समर , आप उसे यहाँ न लाएं । वो और परेशान हो जाएगा ।वैसे भी आजकल वो चिड़चिड़ा हो गया है ।
समर ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा ।
तो क्या हुआ , उसे यहां लाना तो होगा ही । तुम यहाँ अकेले कैसे रहोगी ।
समर की इस बात से वो तड़प उठी थी।
रह लूंगी मैं यहां हॉस्पिटल में ,वैसे भी अकेली ही तो हूँ ।पता नहीं कब से और कब तक रहूं ।
उसकी इस बात को सुनकर समर खामोश ही रहा था।उसने कुछ भी रियेक्ट नहीं किया।
दोनों के दरमियान आई कड़वाहट मंजीत भांप चुकी थी। तभी उसने ने बात संभालते हुए कहा
आप आप .. समर भाई .. आप बेफिक्र होकर घर जाएँ न मैं तो यहीं हूँ फराह के पास । मैं कहीं नहीं जा रही । दो दिन की तो बात हैं, इन्हे घर लेकर ही आउंगी ।
मंजीत ऐसा कुछ ऑफर करेगी समर ने सोचा नहीं था। वो एकदम से एमबैरेस होने लगा था।
मगर आप कैसे । नहीं आप रहने दें । मैं कुछ करता हूँ । हैं कुछ रिलेटिव्स जहाँ मिलने जाते हैं हम। वहीँ कुछ देखता हूँ ।
मगर मंजीत ने समर को फिर से रोक दिया था।
नहीं समर भाई ,मैंने कह दिया न । आपको शीनू को लेकर कहीं जाने की जरूरत नहीं है। ऐसी कोई इमरजेंसी नहीं है । मेरी भी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है । मैंने हमेशा फराह को बड़ी बहन ही समझा है.। ये जो कहती है मैं मान लेती हूँ । तो फिर आज इन्हे भी मेरी बात माननी होगी और आपको भी .और तुम यूँ घूरो मत मुझे ..तुम्हारे मियाँ इंकार नहीं करेंगे …..जीजा को साली की बात माननी ही पड़ती है । उसने हल्की सी स्माइल देते हुए कहा था।
उसने जान बूझकर माहौल की तल्ख़ी अपनी तरफ से थोड़ी कम करने की कोशिश की ।
जिसका असर तो हुआ ..और समर चुप हो गया ।
थोड़ी देर बाद वो घर के लिए निकल गया । जाते हुए भी उसने फराह से एक लफ्ज़ न कहा .और एक बार फिर वो उसकी बेमुरव्वती से ज़ख़्मी हुई थी ।
मगर वो जाते जाते मंजीत के लिए पिज़्ज़ा और कोल्ड ड्रिंक रखकर गया ..
मान गए डिअर , समर भाई तो सच में खफा हैं । एंग्री यंग मन है तुम्हारे मियाँ ..मगर तुम भी हिंदी फिल्मों की सदा बहार हीरोइन से कम हो क्या । जीत जाओगी आख़िर में । और फिर मैं हूँ न सपोर्टिंग रोल में ।
वो अपनी बातों से उसे बहलाने की नाकाम कोशिश कर रही थी .जो बिलकुल खामोश बस छत की तरफ देखती जा रही थी ।
उसने अपनी गर्दन एक तरफ घुमा ली और अपनी आँखें बंद कर लीं …वो ऐसे ग़म में घिरी थी जिसके असरात चन्द घंटो में तो क्या आनेवाले कितने दिनों तक या शायद उसकी सारी ज़िंदगी चिपटे रहनेवाले थे किसे ख़बर थी ।
घंटे भर बाद जब नर्स उसके लिए सूप लेकर आयी तो उसने नर्स को इशारे से मंजीत के लिए कुछ मिलेगा या नहीं पूछा
नर्स ने कैंटीन का बता दिया और उसे सूप देकर चली गई ।
तभी मंजीत उसके पास आकर बैठी और उसे सहारा देकर बिठाया था ।
खुद उसका सूप बाउल लिए उसे पिलाने की कोशिश करने लगी ।
थोड़ा सा ले लो …फराह ..सारा दिन गुज़र गया ..अब रात हो गई है ।
नहीं मंजू … ..अभी कुछ न कहो ..मुझसे कुछ खाया नहीं जाएगा .. मगर प्लीज तुम कुछ खाकर आ जाओ ..मैं ठीक हूँ ।
मेरी फ़िक्र न करो ….मेरे जीजा सचमुच बहुत अच्छे हैं……कितना ख्याल है उन्हें ..देखो वो मेरे लिए पिज़्ज़ा और कोल्ड्रिंक रखकर गए हैं……मैं तो तुम्हारा वेट कर रही थी ..पर तुम सो गई थी ।
इसी बीच घर से उनका फ़ोन भी आया था ।
अच्छा ..कुछ कहा क्या ..शीनू ठीक है न
हाँ वही बताया ..अब आराम करो ..और अगर इजाज़त हो तो मैं पिज़्ज़ा खा लूँ… तुम्हे तो पता है मुझसे भूख सही नहीं जाती ..और हंसने लगी ।
मगर उसकी ये कोशिश भी नाकाम रही ..फराह वैसे ही चुप रही थी।