खूबसूरत शाम...
समर ने उस शाम को खूबसूरत और खुशगवार बनाने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं रखी थी। शीनू को पिक करने के बाद वो दोनों देर रात तक घूमते रहे । शीनू अब थक कर गाड़ी में ही सो गया था।
समर ने उसे गोद में उठाये हुए बेड पर सुलाया और फिर तिरछी निगाहों से फराह को देख रहा था जो उसके दिए इयररिंग्स पहन कर खुद को आईने में निहार रही थी ।
समर को अपनी तरफ यूं टकटकी लगाए देखता देख फराह ने मुस्कुरा कर पूछा ।
देखें …समर ,मैंने पहन ली ये इयररिंग्स । रियली इटस सो ब्यूटीफुल। वाक़ई आपकी पसंद बहुत खूबसूरत है ।
फराह ने हंसते हुए कहा तो समर भी डीप स्माइल करता हुआ उसके एकदम करीब आ गया था।
इसमें कोई नई बात नहीं मॉय डियर लविंग वाइफ , मेरी च्वाइस तो हमेशा से ही लाजवाब रही है। क्यों याद है न तुम्हे भी तो एक नज़र में ही इस दिल में बसाया था । कहते कहते वो अब फराह के एकदम सामने खड़ा था और कनखियों से उसे देख रहा था।
फराह अब उसके इशारे समझ चुकी थी और वो आहिस्ता से पीछे पलटने लगी ।
अच्छा चलें भी .. अब सोना है हमें ..सारी शाम तो आपके इस खूबसूरत सरप्राइज की नजर हो गई है बट इट्स लेट नाऊ.. कल सुबह जल्दी निकलना है।थक गई हूं बाबा। और शीनू भी सो गया है।
फराह ने अभी अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि समर अब उसकी कलाइ थाम कर उसे अपनी तरफ घुमा लेता है।
अरे ऐसे कैसे यार ..अभी तो मैंने क़रीब से अपना तोहफा देखा भी नहीं है और तुम जा रही हो । फिर धीरे से उसे अपने क़रीब करते हुए उसकी आँखों में देखता ही रहा था।
वो आज पूरे शरारत के मूड में था । फराह अब समर के इतने करीब और उससे नजरें उठा कर देख भी नहीं पाई ,वो शर्मा कर नज़रें चुराने लगी पर तब तक वो उसे अपने सीने से लगा चुका था ।
उसने सोचा की जिस बात को दो दिन से छुपाती फिर रही है उसे बता दे मगर फिर उसने खुद को रोक लिया । वो वैसे ही समर के सीने से चिपकी रही और उसकी बाहों में खुद को लूज कर दिया।
समर आज बेइंतहा खुश था और खुश तो वो भी हुई थी आज पूरे दिन समर की इस खूबसुरत कोशिश पर। वो किसी भी वजह से आज मिले ये खुशनुमा लम्हे ज़ाया नहीं करना चाहती थी जो एक मुद्दत के बाद वो दोनों महसूस कर रहे थे । दोनों अपनी ही फीलिंग्स में खो गए थे।
अगले रोज़ उसके कानों में चमकते डायमंड इयररिंग्स और उसकी चमकती आँखें उसकी खुशी बयान कर रहे थे । उसे देखते ही मंजीत एक बार फिर मुस्कुराते हुए उसकी तरफ आई थी ।
क्या बात है फराह..कल कुछ , आज कुछ और…..पहले कार और अब ये इयरिंग्स।
उसने फराह को छेड़ते हुए कहा था।
फराह नॉरमल ही रही और उसने हल्की सी स्माइल करते हुए कहा ।
ऐसा कुछ नहीं …डियर ..कल हमारी मैरेज एनिवर्सरी थी ना , वही समर ने दिए कल ये इयररिंग्स। नथिंग मच यार।
फराह के कहते ही मंजीत खुश हो गई थी।
वॉव.. दैट्स ग्रेट ..मुबारक हो फराह ।पर तुमने कभी बताया नहीं डियर अपनी शादी से रिलेटेड कोई बात। हम दोनो तो तीन साल से साथ काम कर रहे हैं ।
मंजीत के इस सवाल पर फराह थोड़ा अचकचा सी गई थी।
हाँ हां….वो कभी याद न रहा हो शायद .. और लास्ट ईयर तो उस वक़्त घर पर शादी थी न इसलिए ।
पर मंजीत तो अब पीछे हटनेवाली नहीं थी।
हम्म्म ..ऐसे काम नहीं चलेगा मॉय डियर ऐनीवर्सरी गर्ल, अब तो बाक़ायदा कार की और एनिवर्सरी की ट्रीट एक साथ मिलनी चाहिए मुझे और मैं कल आपका गिफ्ट आपको दूंगी जिसे आप इंकार नहीं करेंगी .समझी आप ।
मंजीत ने जोर देते हुए कहा तो फराह नें हां कर दी।
ट्रीट तो पक्की है , मगर गिफ्ट – विफ्ट का चक्कर न रखो तुम…कौन सी न्यूली वेडेड हूं मैं । अब तो 5 साल के बेटे की मम्मा हूं। इतने साल हो गए हैं यार हमारी मैरेज को । पर मंजीत ने उसे बीच में ही टोक दिया था।
क्यों फराह … गिफ्ट का सालों की मैरेज और आपके मम्मा होने से क्या लेना देना। और फिर क्या .गिफ्ट तो बस तुम अपने मियां से ही लोगी । मैं कौन हूँ भला …मैं ही तुम्हे अपना समझती हूँ ..तुम तो मुझे ..मंजीत ने मुंह बनाते हुए कहा तो फराह एमबैरेस हो गई थी। इतने साल में मंजीत ने तो कभी उसकी कोई बात नहीं उठाई थी।
अच्छा बाबा बस.. इट्स फाइन .. अब आगे कुछ इमोशनल सीन बनाने की ज़रूरत नहीं ।
ग़लती हो गई यार ,जैसे अपने मियाँ से गिफ्ट लिया है वैसे तुमसे भी लूंगी । अब दोबारा से ये अपने परायों वाली बात न करना तुम। कुछ रिश्ते कास्ट और रिलीजन से कहीं ऊपर दिलों से जुड़ते हैं और दिलों से ही निभाए जाते हैं । वैसा ही रिश्ता हम दोनों का है ..आज से तुम्हे इजाज़त है जब चाहे जो चाहे मुझसे सवाल कर सकती हो ..कोई ऑफिशिअल फॉर्मेलिटी नहीं होगी हमारे दरमियान ।
फराह ने प्यार से कहा तो मंजीत फिर से नॉरमल हो गई।
ओके फाइन डियर फ्रेंड। आज दिल खुश कर दिया आपने मैडम ।
मगर देखा जाए तो ये बात ठीक नहीं जो गिफ्ट आपके मियाँ से आपको मिलेगा वो भला मैं कैसे दे सकती हूँ आपको । कहते हुए दोबारा से छेड़ा था उसने।
इस बार फराह ने उसें डांट लगा ही डाली।
फिर से मज़ाक किया न तुमने, बाज़ आ जाओ अब तुम अपने इन डबल मीनिंग जोक्स से।
इसीलिए तुम्हे तुम्हारी लिमिट्स में रखना था मुझे ।
मंजीत ने अबकी बार अपने कान पकड़ लिए थे।
अच्छा सॉरी सॉरी , अब और मज़ाक नहीं सिर्फ और सिर्फ काम ।
इस तरह पूरा हफ्ता गुज़र गया ..घर का माहौल भी खुशगवार ही रहा इन दिनों .समर के लाए फूलों की खुशबू अब तक उसका घर आँगन महकाये हुए थी ।