मोहब्बत 2.0_
chapter 1 – समर और फरह…
ट्रिन …….. ट्रिन
ट्रिन………ट्रिन …
फोन के अलार्म की आवाज़ लगातार उसके कानों तक आ रही थी ।
पर वो तो समर का इंतज़ार कर रही थी ।
वो हर दिन मॉरनिंग अलॉर्म बंद करने से पहले समर का वेट करती थी ।
आज शायद समर उठकर उस इन्तेहाई खौफनाक आवाज़ को चंद सेकंड में ही खामोश कर दे..।
पर समर तो उस आवाज़ से बचने के लिए सर पर तकिया लगा के अपना मुंह छुपा लेता था ।
आखिरकार उसे ही उठकर उस अलार्म को खामोश करना पड़ता…।
इतने सालों में एक दफा भी समर ने कभी ग़लती से भी ये कारनामा अंजाम न दिया था.।
पर वो भी हर दिन जानबूझकर अलार्म ऑफ करने में लेट करती थी ।
ताकि कभी तो समर झुंझलाहट से ही ये कर गुज़रे ।
उसे हमेशा से ही अलार्म की आवाज़ से ख़ौफ़ आता था.।
वो हर चंद दिनों के बाद मोबाइल अलार्म चेंज करती ।
नयी धुन लगाती ..।
मगर कुछ रोज़ मे ही वो आवाज़ उसे चुभने लगती थी ।
और वो फिर कोई दूसरी आवाज़ बदल देती ।
और ये सिलसिला यूँ ही चलता रहता ..।
आज भी उसने पूरे पांच मिनट तक लगातार बजने के बाद ही अलार्म ऑफ किया।
और एक बार फिर अगले दिन के लिए नयी धुन लगा दी ..थी ।
सुबह के पांच बजकर पचपन मिनट हो चुके थे .।
वो खासकर अलार्म पूरे कम्पलीट टाइम का कभी सेट नहीं करती थी ।
हमेशा पांच मिनट पहले या पांच मिनट बाद ..।
और यही उसका मामूल था ।
आज काम ज़्यादा था और उसने उठने में देर कर दी थी .।
.उसने बालों को समेटते हुए क्लिप लगाई ।
और किचन में जाकर चाय का पानी रखकर फ्रेश होने चली गयी ..।
दस मिनट बाद जब वो फ्रेश होकर वापस आयी तो पानी यूँ ही खौल रहा था..।
वो तो चाय पत्ती… और चीनी डालना ही भूल गयी थी..।
उसने एक बार फिर घड़ी की तरफ देखा पूरे छह बजकर पंद्रह मिनट हो चुके थे .।
उसने जैसे तैसे चाय बनाई और बाकी के कामों में लग गयी ..।
कल रात उसने सुबह के लिए कोई तैयारी नहीं की थी ..।
बाहर से लौटकर आने में उनलोगों को इतनी देर हो गई थी की उसे वक़्त ही न मिला था ..।
और अब सबका नाश्ता …..।
समर का लंच………शीनू का लंच ।
और उसका खुद का लंच भी तैयार करना था उसे…।
और उसने तो अब तक शीनू को जगाया भी नहीं था.।
वो जल्दी से समर की चाय और न्यूज़ पेपर लिए वापस बेडरूम में गयी जहाँ वो अब तक अब करवटें बदल रहा था..।
उठें… समर
जल्दी से ये चाय लें और अपना पेपर .।
और प्लीज आज पेपर थोड़ा कम दिल लगाकर पढ़ना ।
रात वाली ही सारी खबरें होंगी ।
जो लास्ट नाइट टीवी पर पहले ही देख लेते हो ।
फिर भी सुबह सुबह ये न्यजपेपर ।
बेकार में ही टाइम वेस्ट होता है हर दिन ।
समर अनमने ढंग से चाय हाथ में लेते हुए बोला..।
यार फरह..
तुम्हे आखिर प्रॉब्लम क्या है मेरे न्यूज़ पेपर से..।
एक तो वैसे भी वीक डेज में ठीक से पढ़ भी नहीं पाता हूँ..फिर भी तुम्हे ये कहना लाज़मी होता है ..।
मैंने कब आपको रोका है जितना चाहें पढ़ें ,वो तो आज मुझे देर हो गई थी ..।
इसलिए शीनू को आपको ही रेडी करना होगा,मैं उसके कपड़े बेड पर रख कर जा रही हूँ..
कहते हुए उसने वार्डरॉब से शीनू की यूनिफार्म निकाल कर रख दी ।
और वापस किचन की तरफ पलटी थी ।
तभी समर झुंझलाते हुए बोल पड़ा ..
ओह ..नॉट अगेन.. फरह
क्या हर चार दिन के बाद लेट होने का रोना लेकर बैठ जाती हो।
और ये शीनू को तैयार वैयार करना मुझसे नहीं होता ,वो वाशरूम में खेलता रहता है…और मेरा वक़्त ज़ाया होता है।
न मैं पेपर पढ़ पाता हूँ और न ही ढंग से फ्रेश हो पाता हूँ… फिर से सारा दिन अजीब कैफियत रहती है ।
समर की बात सुनकर वो तपाक से बोली ।
ठीक हैं रहनें दें आप..।
छोटी सी बात को भी ज़हमत बना देते हैं..
कभी कभी बोल क्या दिया शीनू को रेडी करने के लिए ,आपने तो उसे हर चार दिन का मसला बता दिया..
बहुत खूब…. ग़लती मेरी है,मुझे आपसे एक्सपेक्टेशन रखनी ही नहीं चाहिए..।
आप जाएँ ..मैं मैनेज कर लूंगी ।
बात बिगड़ती देख समर ने संभालने की कोशिश की।
अच्छा … अच्छा ..
देखो सुबह सुबह मूड मत ऑफ करो ..न मेरा न अपना .।
.
आज वीक का फर्स्ट वर्किंग डे है ।
मनडे मॉरनिंग खराब तो ..सारा हफ्ता यूँ ही खराब गुज़रेगा ….।
वो तो मैंने इसलिए कहा की मैं शीनू को ढंग से तैयार नहीं कर पाता हूँ ,और आख़िरकार तुम्हें ही हेल्प के लिए बुलाना पड़ता है।
कोई नहीं ..।
.तुम ऐसा करो आज मुझे लंच मत देना .।
मैं कैंटीन में कुछ खा लूंगा न ।
फरह इस ऑप्शन पर रज़ामंद नहीं हुई और उसने कहा ।
रहने दें आप..।
मैंने कहा न…सब समझती हूँ मैं ,और एक आपके लंच नहीं बनाने से कितना टाइम सेव होगा मेरा ।. .
मुझे अपना और शीनू का टिफ़िन तो बनाना ही है।
और फिर शीनू के दोपहर के लिए भी बनाना है।
क्रेच का खाना उसे पसंद नहीं आता ।
फिर थोड़ा रुक कर उसने कहा।
और ये क्या बात हुई …
की मैंने कुछ कह दिया तो आपका सारा हफ्ता खराब हो जाएगा,इतनी पहुँची हुई बुज़ुर्ग हस्ती नहीं हूँ मैं और न मेरी ज़ुबान में इतनी तासीर है इसलिए आइंदा एहतियात रखें।
अरे ..
तुम्हारी ज़ुबान में तो इतनी ,इससे आगे वह कुछ कह न सका और बुदबुदाते हुए वाशरूम में चला गया ।
फरह सुन नहीं सकी जो उसने दबे लब्ज़ों में कहा और शीनू को जगाने लगी ।
शीनू…मेरी जान
उठ जाओ ..बेटा ।
आज मेरा बेटा पांच मिनट में रेडी हो जाएगा।
मम्मा ..आपको जल्दी से तैयार कर देगी ।
चलो शाबाश …गुड बॉय।
किसी तरह बहला फुसलाकर वो शीनू को वाशरूम ले गई।
और खुद वापस किचन में आ गई तब तक दरवाज़े की घंटी बज चुकी थी।
मीना दरवाज़े पर थी ।
मीना का आना सुबह एक गुड न्यूज़ से कम नहीं होता उसके लिए.।
और आज वो थोड़ा पहले ही आई थी।
उसे उम्मीद थी की वो उसकी किचन के काम में भी मदद कर देगी ।