Marriage Anniversary
उसे डाइनिंग टेबल पर हर वक्त समर का मोबाइल लिए रहना बिलकुल ज़हर जैसा लगता पर उसने आज एक लफ्ज़ भी ना कहा
कोई और दिन होता तो शायद इस बात पर अब तक खाना खराब हो चुका होता ।पर उसने तो आज ज़ुबान ना खोलने की क़सम खाई थी ।
फराह की तरफ से कोई रिएक्शन न देखकर समर ने ख़ुद ही मोबाइल किनारे रख दिया । कभी कभी वो भी फराह की खामोशी समझ लिया करता था।
क्या बात है.. डियर वाइफ ..
आज तुमने अपना कोई फलसफा नहीं कहा .. मेरी इस नामाक़ूल हरकत पर …हँसते हुए समर बोला।
समर की बात अभी पूरी भी नही हुई थी कि फराह तपाक से बोली।
जरूरी नहीं की हर बात का रिएक्शन दिया जाए ..और वैसे भी मेरे मना करने से कौन सा आपके ऊपर कोई असर होता है .. ज़ुबान ही खाली होती है मेरी बिला वजह ।
हम्म ….
इसीलिए तो कहता हूँ..मेरे ऊपर और इन फ़िज़ूल की तक़रीरों पर अपनी एनर्जी वेस्ट मत किया करो फराह , अगर अपनी फुल टाइम अटेंशन देनी ही है तो शीनू की तरफ दो, मुझ गरीब पर तो वैसे भी अब कम ही ध्यान रहता है तुम्हारा। बोलते बोलते उसकी नजर जब मिली तो उसने झट से टॉपिक चेंज कर दिया और फिर शीनू की तरफ देखते हुए बोला ।
क्यों बेटा कैसा रहा आपका दिन ।
मगर तब तक तो वो तड़प उठी थी .. उसने तपाक से समर की तरफ देखते हुए कहा था।
शीनू को मुझे कितनी अटेंशन देनी है ..मैं बखूबी जानती हूँ समर ।
और इसके लिए मुझे आपके मशवरे की फिलहात ज़रूरत नहीं पेश आएगी।
उसकी आवाज़ की तल्खी से समर को समझ आ गई थी वो बात जिसकी वजह से फराह खामोश थी और अब उसने खामोशी तोड़ी भी तो थी तो उसके तेवर सही नहीं थे ।
क्या हुआ फराह ?
सुबह के लिए सॉरी यार ..मैंने तुम्हे फ़ोन भी किया..पर एक भी कॉल तुमने पिक नहीं की मेरी आज सारा दिन और ऑफिस से आने के बाद तुम मेरे पास बैठी तक नहीं जरा भी देर के लिए.. पूरा टाइम किचन में ही बिजी रही थी ।
अब ख़तम करो ना यार …कल प्रॉमिस करता हूँ तुम दोनों को तुम्हारी मंज़िल तक पहुंचा कर ही जाऊंगा ।
मंज़िल …
ये मंज़िल क्या है पापा … मुझे तो कल स्कूल जाना है पापा .. शीनू ने जैसे ही कहा … दोनों के हाथ रुक गए और वो खिलखिलाकर हंस पड़े ।
और इस हंसी में उस दिन की सारी कड़वाहट कहीं गुम हो गई थी ।
और अगले रोज़ वादे के मुताबिक़ समर वक़्त से उठा भी तैयार भी हुआ और अपनी दोनों ज़िम्मेदारियों को उनकी मंज़िल तक पहुंचाने के बाद ही अपने ऑफिस के लिए निकला था।
ऑफिस पार्किंग से अंदर जाते हुए फराह ने उसे मुस्कुरा कर बाय किया. तो वो खुश हो गया ।
अच्छा ..तुम्हें पिक भी कर लूँ आज …..अगर कहो ;
क्यों मज़ाक कर रहे हो ..लगता है आज जनाब मेरी खिदमत गुज़ारी में ही ही सारा दिन निकालने के मूड में हैं ।
चलो जाओ भी ..कोई ज़रूरत नहीं मेरी वजह से परेशान होने की.. इतना काफी है..वैसे भी तुम्हे रात में देर हो जाती है ।
नहीं बाबा.. मैं तुम्हारे लिए मैं कभी परेशानी नहीं महसूस करता ..मगर तुम्हे हमेशा ही ग़लतफ़हमियाँ रहती हैं मेरी तरफ से ।
अच्छा ..अब एक दम से ये ग़लतफ़हमियाँ……….. खुशफहमियों में तब्दील तो होंगी नहीं ।
इसलिए आप जाएँ. और.मैं भी जाती हूँ..कहती हुई वो ऑफिस के अंदर चली गई।
समर भी भी खुश खुश ड्राइव करता हुआ निकल गया । ऑफिस में वो थोड़ा रिलैक्स महसूस कर रही थी । गुज़रे दिन की सारी बातें उसने हवा कर दी थीं थी ।मगर वो जिस काम का इरादा कर चुकी थी उसी पर अब भी लगी थी ।
ओह्हो ….मैडम आज तो खुद परिंदो की तरह चहक रही हैं…. क्या बात है
इस धीमी मुस्कान के पीछे क्या राज़ है ..अगर मैं ग़लत नहीं तो उस राज़ को मैंने अभी पार्किंग लॉट की तरफ से जाते हुए देखा है ।
मंजीत ने अपनी डेस्क पर बैठते हुए कहा था।
क्या तुम भी न ……
इसमें राज़ की क्या बात है .. समर ही तो हमेशा ड्राप करते हैं मुझे ।
तो फिर क्या कोई गुड न्यूज़ है …जल्दी बताओ ।
हाँ हैं तो मगर तुम्हारी नाक जिस तरफ जा रही है वैसा कुछ भी नहीं ..और मैं क्यों दू तुम्हे गुड न्यूज़ ।
तुम्हारी तरफ से पेंडिंग है इसकी ।. न तो पहले शादी करती हो और ना उसके बाद वाली ही खबर सुनाने का कोई इरादा है तुम्हारा ।
अरे डिअर …उसी में उलझी हुई हूँ..क्या फैसला लूँ ..समझ नहीं आता ।
डर लगता है की तुम्हारे बच्चे बड़े न हो जाए कहीं मेरी शादी तक… फिर तो कितनी शर्म आएगी मुझे ।
उसकी फ़िक्र तुम न करो ..मैं अपने बच्चों को नहीं लाऊंगी तुम्हारी शादी में.।
मगर बच्चों कहाँ ..अभी तो मैं बस एक वाहिद औलाद की ही माँ हूँ .।
हाँ मगर जैसी तुम्हारी रफ़्तार है ..मेरी गिनती में इज़ाफ़ा हो ही जाएगा लगता है । उसने हंसते हुए कहा तो मंजीत जो अभी अपनी सीट पर बैठी ही थी वो झट से उछल पड़ी थी।
देखा देखा…कहा ना तुम्हें .. वही ..वही बात थी ..अब चोरी पकड़ी गई न तुम्हारी ।
अरे ..बाबा ..कहा न कोई बात नही … है भी तो कुछ और .. फराह ने हकलाते हुए कहा था।
सुनो यार ….एक्चुअली मैं न..अपने लिए एक कार लेने का प्लान रही हूँ ।
बस इतनी सी बात है…..लो बता दिया.।
अभी तक समर को भी नहीं बताया.. और तुम्हे बता दिया न ..अब फूट मत देना किसी को जब तक मैं न कहूं ।
ओह . दैट्स गुड….ले लो ..ले लो । पर इसमें मैं किसी को क्यों बताऊँ ।और ये ऐसी कौन सी खुफिया बात है । फिर अपने मियाँ से क्यों छुपा रही हो ।कार लेने के बाद अपने पर्स में रखोगी क्या । मंजीत ने उसे छेड़ते हुए कहा था।
ये क्या मज़ाक कर रही हो ..और ये मियाँ क्यों बोलती हो ।
क्या मैंने कभी कहा है तुमसे ।सच में जितनी उर्दू मैं बोलती नहीं उससे ज़्यादा तुम मुझसे बुलवाती हो ।कहीं किसी के मियाँ को ही शहीद न करा देना अपनी मांग भरने के लिए ।
व्हाट …यार ..ये तुम्हे पसंद नहीं तो मैं नहीं बोलूंगी ..पर मुझे तो तुम्हारी ज़ुबान अच्छी लगती है।
बस इसी लिए और फिर मेरे वीर जी कहते हैं के जिनके साथ सुबह शाम का उठना बैठना हो ,साथ में काम करना हो थोड़ी बहुत उनकी ज़ुबान सीख लेनी चाहिए ।
इस बहाने मैं उर्दू सीख लेती हूँ ,नापसन्दीदगी की कोई बात नहीं ।तुम्हें अच्छा लगता है तो तुम चाहे जिस टाइटल से उन्हें नवाज़ो ….मुझे कोई ऐतराज़ नहीं ।
अच्छा…अब बाक़ी उर्दू की क्लास लंच टाइम में .. वरना हमारी क्लास लगने वाली है …..उधर देखो मोगैम्बो की सवारी आ चुकी है ..
और जल्दी से दोनों अपने काम में जुट गईं ।
काम से फ्री होने के बाद लंच टाइम में ही मंजीत के साथ बैठकर उसने कार लोन की सारी डिटेल्स ले ली थी ।
और दो कार भी शॉर्टलिस्ट कर ली थीं ।अब बस उसे समर को राज़ी करना तो नहीं था , हां बस उसे इन्फॉर्म करना था तभी तो इस वीकएंड वो उसके शामिल अपनी कार ले पाएगी ।
ऑफिस टाइम के बाद वो जैसे बाहर आई समर ने एकदम से उसके सामने आकर गाड़ी को ब्रेक लगाए थे और उसके लिए कार का दरवाज़ा खोल दिया ।
फराह तो अब तक हैरत में थी मगर मंजीत जरूर उसे शरारती नज़रों से देख रही थी ।
जाते जाते वो धीरे से उसके कान में फुसफुसा गई।
जल्दी से हमें भी दुआ देती जाओ की कोई ऐसा जानिसार हमारा भी हो ..कसम से सौ लंगर कराऊंगी जाकर गुरूद्वारे में।
और हँसते हुए वो उन दोनो को बाय करते हुई निकल गई ।
फराह के अंदर गाड़ी में बैठते ही समर ने कहा था।
जल्दी बैठो न ..फराह ..अभी शीनू को भी पिक करना है ।
और अपनी जेब से एक सुर्ख गुलाब उसकी तरफ बढ़ाया था।
वो उसे हैरानी से देख रही थी ।
ऐसे क्या देख रही हो……अच्छा पहले ले तो लो ।वरना शीनू के सामने दिया तो उसके सौ सवाल होंगे, ले भी लो ना ..फिर शीनू के सामने दे नहीं पाऊंगा .. उसने बड़े साफ लहजे से कहा था।
समर की इस साफगोई पर वो हंस पड़ी ।
उफ़ …क्या मैं ख्वाब तो नहीं देख रही ..आज बदले बदले से मेरे सरकार नज़र आ रहे हैं ।
सुबह से शाम हो गई है .. मगर मोहब्बत अभी तक तरोताज़ा है इस गुलाब की तरह …और और दीवानगी ऐसी की ज़रूर आज हाफ डे ही काम हुआ होगा ऑफिस में ।
मेरे मामले में तुम एक दम सही होती हो …बिलकुल सही अंदाजा लगाया है तुमने ।
पर बदले आपके नहीं मेरे सरकार हैं मोहतरमा , तभी तो आज का दिन तो तुम मुझे हमेशा याद कराती हो ।
वेट ..माय लव …आज मैं तुम्हारे किसी सरप्राइज के चक्कर में नहीं आनेवाला , इसलिए आज सारी प्लानिंग मैंने कर रखी है ।
आई नो ….आज भी तुम कुछ न कुछ ऐसा करोगी ही ।
बट माय डिअर लविंग वाइफ… अब मैं भी स्मार्ट हो गया हूँ ।
और उसने डैशबोर्ड से एक और गिफ्ट बॉक्स निकाल कर फराह की तरफ बढ़ाया ।
हमारी शादी को आज सात साल हो गये …देखो सात साल की ये क़ैदे बा मुशक़्क़त भी गुज़र ही गई ।इसी तरह सारी उम्र क़ैद भी गुज़र ही जाएगी …हिम्मत और हौसला रहे तो फिर इंसान क्या न कर गुज़रे।
वो कह रहा था और कहते कहते हँसता ही जा रहा था ।
फराह जो देर से समर की ये बातें सुन रही थी ।अब वो ख़ुद शॉक्ड थी और दिल ही दिल में शर्मिन्दा भी थी।
वो खुश तो थी मगर उसने क़ुबूल किया की आज पहली दफा वो ये दिन भूल गयी थी ।
थैंक्स समर …मैं बहुत खुश हुई ..आपके इस सरप्राइज से ।मगर मैं ग़लत नहीं कहूंगी मैं वाक़ई भूल गई थी । सच में पता नहीं कैसे आज भूल गई ।
रहने दो ..तुम यूँ ही कह रही हो ..समर ने उसे रोकते हुए कहा ।
नहीं समर …….रियली…मेरे ज़ेहन से निकल गया …आप नाराज़ तो नहीं हैं न आज मुझसे ।
ओह्ह्हो …फोरगेट इट ।तुम कहो या मैं एक ही बात है..और आइंदा आनेवाले सात सालों तक ये मेरे ज़िम्मे ।
अब मुस्कुरा भी दो यार ..अभी तो और भी खुशनुमा झटके मिलेंगे इस राह में मेरी जान । समर ने फराह को कनखियों से देखते हुए कहा था।
लगता है इरादे नेक नहीं हैं आज जनाब के ।
इरादे तो मेरे हमेशा ही नेक रहे हैं …बस आप रज़ामंदी तो दें..बन्दा हाज़िर है ।
और उसने शरारत से फराह की तरफ देखा तो वो शर्मा गई और बाहर देखने लगी …
माय गॉड ..अभी भी शर्माती है मेरी बीवी ..कहते हुए समर हंस रहा था और वो सुर्ख गुलाब हाथों में लिए सुर्ख हुई जा रही थी ।
स्टॉप लाफिंग ..समर ..ये क्या कर रहे हो आप ।
और ड्राइविंग पर ध्यान दें..देखो कितना फ़ास्ट ट्रैफिक है ।
कहकर वो खामोश हो गई ..समर भी संभलकर ड्राइव करने लगा और ऍफ़ एम् पर फराह का फेवरिट स्टेशन प्ले कर दिया
वाक़ई वो शाम गुज़िश्ता कई दिनों के बाद उसके लिए एक यादगार शाम बनकर आई थी ।
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