Working Women
वो अपना काम तो कर रही थी पर आज ऑफिस में उसका मन बिलकुल नहीं लग रहा था ..
वो समर की सुबह की हरकत से मन ही मन खफा थी .. समर चाहता तो रुक सकता था..पर वो नहीं रुका ..और आजकल वो ऐसा आये दिन करने लगा था.
वो हफ्ते में दो दिन तो उसे छोड़कर ही जाता था…उसे रह रह कर ग़ुस्सा आ रहा था की समर ने कुछ लम्हे के लिए भी उसका न सोचा और चला गया …कौन सा वह उसकी ड्यूटी पर लगा था
सिर्फ ड्राप ही तो करता था ..आती तो वो ख़ुद से ही थी ..शायान को पिक करना भी उसी के ज़िम्मे था..समर की वापसी का टाइम फिक्स भी तो नहीं था…..इन्ही ख्यालों में उलझी थी की तभी ऑफिस बॉय ने आकर कहा ।
मैडम….वो बॉस आ गए हैं…आपसे फाइल मंगवाई है..प्लीज ज़रा जल्दी दे दें।
वेट ..वेट .. राजू ..एक मिनट रुको …ज़रा री चेक तो कर लूँ….सब पेपर्स ऑर्गनाइज्ड है या नहीं ..कहकर वो एक सरसरी नज़र फाइल को देखने लगी ..
वो जानती थी की उसने लास्ट डे ही सारा प्रेजेंटेशन कम्पलीट कर लिया था..वो औरों की तरह ऑफिस का काम घर पर नहीं ले जाती थी कभी ..क्यूंकि घर पर न उसे फुरसत मिलती थी न इत्मीनान की कोई ज़रूरी काम निबटा सके..इसलिए उस दिन भी वो जाते जाते अपना काम मुकम्म्ल करके ही ऑफिस से निकली थी ।
फिर उसने फाइल राजू को दे दी जो उसे सीधा लेकर बॉस के केबिन में चला गया ।
उसे मालूम था की वहां बॉस की शक्ल में बैठा मोगैम्बो उसकी तरफ से की गई ग़लती को ग़लती से भी नज़रअंदाज़ नहीं करेगा और जिस तेज़ी से उसने वो फाइल मंगवाई है वापस उसी तेज़ी से इस दफा उसे बुलवाएगा ।
इसलिए वो उसी तरफ कान लगाए रही और फिर से उन्ही ख्यालों में खो गई..
लंच टाइम हो चुका था. मंजीत उसकी साथ वाली डेस्क पर ही थी ..उसने अपना पर्स उठाया और बाहर जाने लगी .तभी फराह ने उसे रोक दिया ।
कहाँ जा रही हो मिस लेट लतीफ ..रुको जरा मैं भी तो साथ चलूँ ।
तुम ..तुम क्या करोगी मेरे साथ ..तुम तो लंच लेकर आयी होगी न..वैसे भी तुम हर दिन बाहर का कुछ खाती भी नहीं .. मंजीत ने मुंह बनाते हुए कहा था।
तो क्या हुआ ..इकट्ठे लंच तो करेंगे ..और तुम्हारे लिए भी लायी हूँ ..कोई नयी बात है क्या ..चाहे कुछ भी हो ..एक पराठा तुम्हारे नाम का रख ही लेती हूँ.. फरह ने जब मुसकुराते हुए कहा तो मंजीत भी अपना बना हुआ चेहरा ठीक करने लगी।
मुझे पता था ..यार.. पर यक़ीन करो आज मैं भुक्कड़ों की तरह खानेवाली हूँ..और इस चक्कर में तुम जरूर भूखी रह जाओगी ।
कोई भूखा नहीं रहेगा यार … फिर साथ साथ कुछ और आर्डर कर लेंगे.. बस अब चलो भी ..कहते हुए वो उसका हाथ थामे बाहर निकल गई।
लंच ख़त्म करने के बाद मंजीत ने अपने लिए कॉफी मंगवाई जिसके लिए वो सुबह से परेशान थी..
सच में ..फराह ..अब जान में जान आयी है …भूखे पेट तो भजन भी नहीं गाये जाते ..फिर कहाँ से मैं उस खतरनाक मोगैम्बो का मुक़ाबला करती ..आया था उसका जासूस मेरी तरफ ..मैंने भी उलटे पांव लौटा दिया ..कहा की सेकंड हाफ में फाइल रेडी कर दूंगी..अब जाकर अक्ल की घंटी बजेगी तब कही जाकर मेरा काम पूरा होगा । लंच आवर के बाद ही तो रियल मंजीत एक्टिव हो पाती है मॉय डियर फ्रेंड।
फराह जो चुपचाप ये सब सुन रही थी.. उसे अपनी बातों में दिलचस्पी न लेते देख मंजीत ने फिर सवाल किया।
आज कहाँ लॉस्ट हो तुम डियर ?? सुबह से वाच कर रही हूँ ।
मैंने देखा तुमने तो फटाक से अपनी फाइल दी और फ्री हो गयी .. फिर क्या प्रॉब्लम है तुम्हे….वो क्या कहती हो तुम ……….
हाँ…… अभी फिलहाल तो मुझे तुम्हारी दुआओं की ज़रूरत है ..कहते हुए वो हंसने लगी थी ।
बेकार की बात मत करो.. फरह ने अपना फेस दूसरी तरफ टर्न करते हुए कहा।
वैसे भी आज मेरा मूड ऑफ है..और पूछना तो बिलकुल मत ..मैं नहीं बतानेवाली ..हरगिज़ नहीं ..कहते हुए वो वापस चली गयी ।
तभी समर की कॉल आने लगी पर उसने पिक ही नहीं की और अंदर चली गयी ।
मंजीत माजरा कुछ हद तक समझ चुकी थी ..पर दोस्ती अपनी जगह और पर्सनल इश्यूज अपनी जगह ..इस वर्किंग कल्चर में कोई किसी के इंटरनल मैटर्स में दखल नहीं देता या मदद की पहल नहीं करता जब तक की सामनेवाला ख़ुद उससे अपनी प्रॉब्लम शेयर न करे …और किसी तरह की हेल्प एक्सपेक्ट करे।
ऑफिस से निकलते निकलते समर की तीन कॉल मिस्ड हो चुकी थीं..पर उसने किसी एक कॉल का भी जवाब देना गवारा न किया और तेज़ क़दमों से चलती हुई ऑटो में जाकर बैठ गयी …उसका मूड वाक़ई खराब था और उसने जान बूझकर ख़ुद को उसी हालत में रखा हुआ था।
क्रेच में जब वो पहुँची तो शायान सोया हुआ मिला उसे ..किसी तरह उसे लेकर वो घर की तरफ निकली ।
वापस आने पर शायान थोड़ी देर तो सुस्त रहा ..फिर दूध पीकर कॉरिडोर में ही अपने फ्रेंड्स के साथ खेलने लगा था ।
और वो अपनी चाय लेकर बालकनी में आ गई..चाय बनाते हुए ही उसने अंडे उबालने को रख दिए थे .आज फ्रिज में चिकन ख़त्म हो चुका था.. सो उसने एग करी और फ्राइड राइस ही बनाने का सोचा था ।
बालकनी में ही वो न्यूज़ पेपर पलटने लगी ..जो समर का सुबह का मामूल था..वही मामूल उसका शाम का था ..पर वो इस मामले में पाबन्द बिलकुल नहीं थी ….कुछ बातों को छोड़कर वो और ज़्यादा किसी भी टाइप की रूटीन फॉलो नहीं करती थी ।
तभी उसका फ़ोन दोबारा बजा ..इस दफा कॉल किसी और की थी ।
फिर से कॉल कॉल वही कार और होम लोन दिलानेवालों की जमात से थी जो बिन माँगी बरसात की तरह कभी भी किसी के भी फ़ोन पर टपक पड़ते थे।
पहली लाइन सुनते ही उसने फ़ोन डिसकनेक्ट करना चाहा पर अगले ही सेकंड वो रुक गई ,उसके दिमाग़ में कुछ पक रहा था शायद सुबह से ही और इस अनचाही कॉल ने उसके इरादों को और मज़बूत कर दिया था ।
अब उसने सारी बातें डिटेल में उस बन्दे से की और हफ्ते के आख़िरी रोज़ उसे लोन फाइनल करना था।
उसने कार लेने का मन बना लिया था…वो जो अब तक इसे टालती आ रही थी ..आज सुबह के समर के रवैये से इतनी परेशान थी की उसने इसी हफ्ते अपनी ख़ुद की कार लेने की ठान ली ..और ये भी इरादा कर लिया की इस बात की वो समर को आखिर तक हवा भी न लगने देगी ।
क्यूंकि वो जानती थी की समर किसी न किसी बहाने इसे रोक देगा..वो पहले भी दो दफा इस बारे में उससे डिसकस कर चुकी थी पर समर ने बड़ी ख़ूबसूरती से इसे टाल दिया था ।
कुछ मामलों में वो ख़ुद को हमेशा ऊपर रखता था …और उसे थक हारकर वही करना पड़ता जो समर को मुनासिब लगता या जो वो तय करता ।घर के सारे मैटर्स में समर की ही बादशाहत थी …वो बाहर जॉब ज़रूर कर रही थी पर समर उसकी हर बात मानने के लिए बिलकुल पाबन्द नहीं था ..इसके उलट वो उसकी उन्ही बातों पर हामी भरता जिस पर वो ख़ुद राज़ी होता ।
लोग कहते हैं की औरत अगर चाह ले तो उसके पास हज़ार रास्ते होते हैं मर्द से अपनी बात मनवाने के लिए ,पर ये ऐसा हर घर और हर कंडीशन में मुमकिन नहीं होता ।
औरत की अपनी बंदिशें हैं जिसे वो घर की चार दीवारी से बाहर निकलने के बावजूद ख़त्म नहीं कर पाती और मर्द की अपनी आज़ादी है जिससे वो किसी सूरत समझौता नहीं करता चाहे औरत घर संभाले या घर से बाहर क़दम रखे ।उसे हर मामले में मर्द की तरफ देखना ही पड़ता है चाहे उसकी सवालिया निगाहों का जवाब देने के लिए या फिर अपनी किसी और गुज़ारिश के लिए ।
उस रात उसने खामोशी से खाना टेबल पर लगाया और समर को आवाज़ दी थी जो ऑफिस से आने के बाद अपनी चाय और स्नैक्स लिए टीवी में मगन था ।
आज उसने शीनू का होम वर्क देखने के लिए भी उसे नहीं कहा था..जवाब मालूम था उसे की वो आज भी बहुत थका हुआ होगा..इसलिए उसके आने से पहले ही उसने शीनू का होमवर्क करा दिया था ।
समर आ जाएँ .. खाना लगा दिया है मैंने ।
थोड़ी देर में समर अपना मोबाइल हाथ में लिए हुए डाइनिंग टेबल के पास आया और अपनी चेयर
एक तरफ खींचकर वहीं टेबल पर मोबाइल देखने लगा ।
वो मुस्कुरा रहा था…शायद कोई जोक पढ़कर उसे हंसी आ रही थी ।