speed breakers...
समर अब धीरे धीरे कह रहा था। औऱ फराह खामोश खड़ी थी। वो तो उसी जगह जम सी गई थी।
हां .. फराह .तब तो न हिम्मत थी और न ही कोई जस्टिफिकेशन , वो तो आज भी नहीं है मेरे पास । आज भी खाली ही हाथ खड़ा हूं तुम्हारे सामने। मैं तो खुद अपनी ही नजरों में गिर गया हूं।
पर देखो न फराह मुझे , अब मैं थक गया हूँ यार । तुम्हारे बिना और नहीं चला जाता मुझसे ।तुमने तो रहकर दिखा दिया मुझे मगर मैं .. मैं नहीं रह सकता। मैं घुट रहा हूं । पल पल घुटता हूं जब अपने बच्चे को उस कंडीशन में देखता हूं । मेरा शीनू तो जाने कितनी गहरी नींद में सोया है और तुम्हे तो मैंने खुद ही खुद से जुदा कर दिया.।
शीनू का नाम आते ही फराह एकदम से फट पड़ी थी।
तुम बहुत बुरे हो समर । बहुत बुरे ।
कुदरत ने क्या कम कहर गिराया था मुझपर जो आपने भी मेरे वजूद को तार तार कर दिया।
ऐसा तो हमारा रिश्ता न था समर। क्या से क्या बना दिया आपने मुझे।
वो कह रही थी और समर खामोशी से सर झुकाए उसका हाथ मजबूती से थामे खड़ा हुआ था।
फराह धीरे धीरे अपनी गिरहें खोल रही थी।
ये वक्त नहीं है समर जो मैं अब आपसे हिसाब किताब करने को बैठूं। पर इस दफा इतनी आसानी से माननेवाली नही हूँ मैं । बस एक बार मेरे शीनू को ठीक हो जाने दो । फिर देखना आप मेरी नाराज़गी । आखिर आपको भी तो एहसास हो अपने जुर्म का । जब चाहा ज़ख्म दिए और मरहम भी खुद ही लगाएंगे । ये ..ये सारी बातें जो अभी आपने कही हैं सब याद रखना ।
समर अब उसका हाथ थामे लरज रहा था।
हां फराह.. सब याद रहेगा मुझे। इडियट हूं मैं। और तुम्हारी मोह्ब्बत के लायक तो बिल्कुल नहीं ।
पर अब और नहीं ..फराह शीनू के लिए ही सही अपने गुनहगार को माफ़ कर दो ।
शीनू का नाम सुनते ही हो दर्द से तड़प उठी और समर के सीने से लिपट गई थी।
वो कुछ देर तक उसके सीने से लगी सिसकती रही थी । समर की शर्ट अब उसके आंसूओं से भीग चुकी थी।
इतने दिन की ग़लतफ़हमियों और बदगुमानियों की धुंध छटने लगी ।
देर शाम 7 बजे।
वो दोनों शीनू के क़रीब जाकर बैठ गए थे।
आज मैं यहीं रुक जाऊँ ……हॉस्पिटल में फराह ने उसकी तरफ देखते हुए कहा ।
हाँ हां क्यूं नहीं ,मगर तुम सो नहीं सकोगी यहां जगह कम है।
नींद किसे आती है …….अब तो तभी सोऊंगी जब मेरा बच्चा जागेगा ।
और वो दोनों वहीँ चेयर पर बैठे रहे थे।
वो सारी रात शीनू का हाथ थामे बैठी रही और अचानक सुबह चार बजे शीनू की उँगलियों में कुछ हरकत हुई ।
उसने दौड़कर समर को जगाया जो सोफे पर हल्की नींद में था ..
आज इतने दिन बाद शीनू ने पहली बार रेस्पॉन्ड किया था ..वो एक दम से भागता हुआ नाइट ड्यूटी के डॉक्टर्स के पास गया ..
डॉक्टर्स ने उसे फ़ौरन चेक किया और एक सीनियर डॉक्टर को बुलाया ..
सीनियर डॉक्टर के आने पर पूरी टीम एक दफा पूरे जोश से उसके ट्रीटमेंट में लग गई..
और चौबीस घंटे बाद वो करिश्मा भी हो गया ..
पूरे एक महीने के बाद शीनू को होश आ गया था
अल्लाह ने उनकी सुन ली थीं और वो दोनों सजदे में गिरे अपने मालिक का शुक्र अदा कर रहे थे ..
एक हफ्ते बाद शीनू को डिस्चार्ज भी मिल गया…वो दोनों खुशी खुशी उसे लेकर हॉस्पिटल से निकले ..
तभी समर ने टैक्सी के लिए कॉल की …
फराह और मंजीत शीनू के साथ वही खड़े थे..आज मंजीत भी उनके साथ आनेवाली थी..
टैक्सी के लिए उसे बोलता देख वो दोनों चौकी
फराह ने पूछा ;
क्यों समर .. गाड़ी खराब है क्या..
नहीं ..समर एक पल के लिए ठिठका ..मगर फिर बोला
वो दरअसल मैंने गाड़ी तो बेच दी …
मगर क्यों !!!!..मैंने तो …
हम्म …….चलो पहले बैठो तुमलोग फिर बताता हूँ..
रक़म थोड़ी कम पड़ रही थी और तुम्हारे ज़ेवर भी वापस लाने थे ..सो दोनों काम हो गए ..तुम्हारे ज़ेवर तुम्हारी वार्डरॉब में रखे हैं..चेक कर लेना…
उसने हैरानी से मंजीत की तरफ देखा
उसकी तरफ मत देखो ..मैंने उसे मना किया था …
मंजीत ने पहले ही हाथ ऊपर कर दिए ..
तो सब खिलखिलाकर हंस पड़े थे ।
चार दिन बाद।
घर वापस आने के बाद से ही वो काफी परेशान थी , मगर शीनू की केयर और दूसरी बातों से उसे टाइम ही नही मिल रहा था कि वो समर से बात करे। इतने दिनों से समर भी घर पर ही रूका था। शीनू की केयर के लिए उसने कुछ एक्सट्रा लीव ले ली थी ।
पता नहीं ..कितनी रक़म समर ने अरेंज की थी और किस तरह……उसने अपनी गाड़ी तो बेच दी पर उसके ज़ेवर जाने न दिए ..वो मन ही मन पशेमानी में थी ।
उस रात को सोते वक़्त उसने दोबारा समर से जानना चाहा ।
एक बात पूछूं…
हम्म्म…..कहो ना..क्या बात है।
वो… वो शीनू के ट्रीटमेंट में बहुत पैसे खर्च हुए हैं न….और आपने मुझे बताया भी नहीं , सब कैसे हुआ।
हाँ……..तुम फिक्र न करो….अल्लाह के करम से सब हो गया ..जो सेविंग्स थी सब दे डाली, कमाया किस लिए था ।
और तुम ही कहती हो ना ..जान का सद्क़ा ही है माल और क्या ।
मगर ….आपकी कार भी तो…
हाँ वो ..कहा तो …तुमने बिना बताये ज़ेवर एक्सचेंज में दे दिए ..कल को पंगे हो जाते वापस लेने में.
.और कुछ अमाउंट कम पड़ रहा था ..तो गाड़ी हटाने से वो भी इत्मीनान हो गया …
पर आप ऑफिस कैसे …
क्या ..इससे पहले नही जाता था…चार साल ही तो हुए हैं कार लिये…..पब्लिक ट्रांसपोर्ट है न…
वो मैं कुछ कहूं…
हाँ…
कल से तुम दूसरी कार लेकर जाना …
कौन …..तुम्हारी कार ..
मेरे तुम्हारे की बात कब से हुई हमारे दरमियान ..
नहीं वो बात नहीं ..पर कुछ दिनों में तुम्हें जाना होगा तो कैसे जाओगी …
अब मुझे कहीं नहीं जाना
क्या मतलब…
मतलब यही की मैं रिजाइन करनेवाली हूँ..
रिजाइन !!! मगर क्यों…
वो एक दम से हैरान हुआ था
मेरी बात से अब तक खफा हो…यार हो गई ग़लती ..पर इतना बड़ा स्टेप न लो . यानी तुमने दिल की गिरहें नहीं खोली ……ऐसे तो मेरे गिल्ट मुझे और भी ज़्यादा एहसास दिलाएंगे हर पल ..हर दिन…….
नहीं समर कैसे गिल्ट…..शौहर बीवी में सौ उंच नीच हो जाती है …हम किसी दूसरी दुनिया की मख़लूक़ तो हैं नहीं ….इसी मुआशरे के मियाँ बीवी हैं….और फिर आपने जो किया उसकी तलाफ़ी भी तो कर ली..फिर तो सवाल ही नहीं .
.तुम्हारी मोहब्बत में हज़ार दफा मर जाऊँ…मगर ज़बरदस्ती और दहशत के रिश्ते मे एक पल सांस लेना मुझे भी गवारा नहीं …मैं इतनी भी कॉम्प्रोमाइजिंग नहीं ।
तो फिर इमोशनल होकर ये फैसला कर रही हो…
Be Practical ..फराह .. अभी वक़्त है । अपना पूरा वक़्त लो और फिर तय करना । ज़िंदगी की हकीकत के आईने में इमोशंस ज़्यादा देर तक नहीं ठहरते । फिर बेचैनी और घुटन उसी रिश्ते को चोट पहुंचाने लगते हैं ।जिन रिश्तों के लिए हम खुद को इंतहाई मुश्किल इम्तेहान में डालते हैं ।
नहीं समर ज़िंदगी का सफर हमेशा एक रफ़्तार में नहीं होता । यहाँ इस ट्रैफिक में सिर्फ ग्रीन लाइट ही नहीं मिलती हमेशा ।और भी रंग हैं हमारी लाइफ में जिनके इशारे से हमारी रफ़्तार तय होती है ।जब ये रुकने का इशारा करें तो थोड़ा ठहरना भी पड़ता है ।
स्पीड ब्रेकर्स भी मिलते हैं , इस सफर में तब .रफ़्तार थोड़ी धीमी भी करनी होती है । थोड़ा इंतज़ार भी करना पड़ता है और वापस जब चलने का इशारा हो तो फिर चलना होता है । और ये सिलसिला सारे सफर मुस्तक़िल चलता रहता है ।
समर अब फराह की बदली बदली बातों से शॉक्ड हो रहा था।
तो फिर ये रुकने का इशारा है …!!!
नहीं …रफ़्तार धीमी करने का….वक़्त की नज़ाकत और उसकी मांग को समझने का ।
ये हरगिज़ नहीं की मैंने अपने सारी इरादों और ख्वाहिशात से खुद को अलहदा कर लिया है ।बस अभी फिलहाल उन्हें साइलेंट मोड पर किया है ।
फिलहाल कुछ और नहीं । अभी मुझे सिर्फ और सिर्फ अपने शीनू को देखना है । मैने आपसे कहा था न समर । एक दफा मेरा शीनू अच्छा हो जाए फिर मैं कुछ भी याद नहीं रखूंगी ।
वैसे मैने ऑफिस में work from home के कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए अप्लाई कर दिया है। अगर वहां से कोई रिस्पॉंस आया तो ठीक है। Otherwise its ok…
देखा जाएगा..बाद में कुछ महीने या साल या जब घर की सिचुएशन बेहतर होगी । वक़्त की कोई बंदिश नहीं ।
समर ने उसे हैरानी से देखा मगर उसका चेहरा इत्मीनान और पुर सुकून था।
उसने उसका मूड चेंज करने की कोशिश की
तब इस दौरान मैं क्या करूँ..
एक काम करता हूँ….अब से आधे दिन ऑफिस और बाक़ी के आधे दिन अपनी प्यारी सी वाइफ की सर्विस में ये बन्दा हाज़िर रहेगा ।
जिसमे फुल टाइम इश्क़ होगा …कम्प्लीट..रोमांस होगा ..नो ड्रामा..नो एक्शन..
उसकी इस बात पर फराह बस स्माइल देकर रह गई ।
आई लव यू ..फराह..
पर तुम कोई बोझ लेकर नहीं रहना …तुम्हारी खामोशी मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होती ।
तुम तो यूँ ही हंसती ..मुस्कुराती .मेरी मिस्टेक्स पर नाराज़ होती ,मेरी कंपलेंट करती हुई ही मेरे दिल में रहती हो।
मैं किसी सूरत तुम्हारी खामोशी की वजह बनकर खुश नहीं रह सकता ।
जानती हूँ मैं…. फिर से ये सब कहने की ज़रूरत नहीं है तुम्हें ।
और इस दफा वो दिल से मुस्कुराई थी ।
समर ने अब हंसते हुए आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया था।
तो फिर अब जब मेरा सारा अकाउंट सेटल हो गया है । तो क्या माफी से वापस मोहब्बत का सफर शुरू हो सकता है।
अब उसने शरारत से फराह की आंखों में देखा तो वो समर की मजबूत बाहों से निकलने की नाकाम कोशिश करने लगी थी।
समर की गिरफ्त इतनी स्ट्रॉन्ग थी कि वो कसमसा रही थी और समर उस मोमेंट को इनजॉय कर रहा था।
आखिरकार फराह के चेहरे पर शर्म की आमद हो गई थी। उसने वैसे ही समर की बाहों में खुद को लूज कर दिया ।
अब समर स्माइल कर रहा था और धीरे धीरे फराह को अपने मजबूत घेरे में ले रहा था।
फराह ने उसके चेस्ट में सिमटकर अब अपनी आंखें बंद कर ली थीं।
एक साल से ज़्यादा का अरसा गुज़र गया …..
उस दिन मंजीत की शादी थी और वो देर से शामिल हुई थी …
यार देर हो गई आने में…अब इतना भी मुंह न फुलाओ
.और मोटी लगोगी ..बेचारे दूल्हे मियाँ को सदमा लग जाएगा ..
लगता है तो लगने दो…पर आज मैं तुम दोनों मियाँ बीवी से खफा हूँ..
और कहाँ छुपाया है मेरी प्रिंसेस को …
कैसी ज़ालिम हो …..इतनी सी बच्ची को कोई छोड़कर आता है भला …
तभी समर अपनी नन्ही परी को गोद में लिए और शीनू की उंगली थामे उनके क़रीब आया …
बिलकुल सही कहा …तुमने …इरादा तो इसका कुछ ऐसा ही था…..मगर मैंने तुम्हारा प्रॉमिस जो पूरा करना था..इसीलिए हाज़िर हुए हैं..मियाँ बीवी बच्चों समेत ..
और वो तीनों खिलखिलाकर हंस पड़े ….वही खड़े नए नवेले दूल्हे मियाँ इन रिश्तों के खुशगवार लम्हों को महसूस कर रहे थे और अपने किरदार को इनकी कहानी में शामिल करने की तैयारी …….
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