मियां-बीवू और मेल ईगो...
फराह जाने कब से अपने ख्यालों में गुम थी पर जैसे मंजीत ने उसे पकड़कर हिलाया तो जैसे वो उन ख्यालों के भंवर से बाहर आई ।
क्या हुआ फराह । आज मैं आ नहीं सकी जल्दी ।
कम्बख्त मोगैम्बो ने हॉफ डे करने ही नहीं दिया । एंड बाई द वे अभी समर भाई मिले थे बाहर मुझे बहुत मायूस थे वो।
मैंने उन्हें भी कहा है और तुम्हे भी कह रही हूँ । हमें हिम्मत रखनी है देखना सब अच्छा होगा मॉय डियर फ्रेंड।
उसके इतना कहते ही फराह की आंसूओं से सूजी आंखें फिर से गीली हो गईं थी।
झूठी तसल्लियाँ ना दो मुझे मंजू । अब कोरी उम्मीद और दुआओं का ही सहारा है ।
यहां हॉस्पिटल में तो काफी लंबा ट्रीटमेंट होने के चांसेज है। उसमें भी डाउट्स ही हैं यहां के डॉकटर्स को।
मंजीत ने फिर भी उसे हौसला देना नहीं छोड़ा।
नहीं फराह । कोई डाउट – वाउट नहीं है यार। तुम्ही तो कहती थी ना , की इंसान को उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए । अगर उम्मीद ख़त्म तो इंसान अपनी शिकस्त पहले ही क़ुबूल कर लेता है और आधा तो वो तभी मर जाता है जब उसकी उम्मीदें दम तोड़ने लगती है ।
इसलिए ..मेरी बात सुनो .. और अपनी आस के दिए को बुझने न दो मेरी जान ।
मंजीत की इस बात पर फराह फिर से सिसकने लगी थी।
तुम वाक़ई में फरिश्ता हो हमारे लिए , एक रोटी का बदला इस तरह चुकाओगी तुम । कभी सोचा नहीं था मैने ।
रोटी का क़र्ज़ तो कोई चुका ही नहीं सकता फराह डियर , और मैं तो तुम्हारे हर निवाले की कर्ज़दार हूँ । इतनी जल्दी अकाउंट सेटल नहीं होगा हमारा ।
मैंने कहा है न की तुम अपने बच्चो के साथ मेरी शादी में आओगी , तो फिर आओगी है न समझी तुम ।
काश ऐसा ही हो… , फराह ने गहरी सांस ली थी , अब वो आस बाहरी नज़रों से अपनी हमदर्द को देख रही थी ।
समर ने काफी भाग दौड़ कर उस बड़ें अमाउंट का इंतज़ाम कर लिया था और शायान का ट्रीटमेंट शुरू हो गया था मगर कुछ रक़म कम पड़ रही थी पर उसने फराह से ज़िक्र तक नहीं किया था।
ये सारी बातें उसे मंजीत के मार्फ़त पता चली थीं । वो अंदर ही अंदर तड़प उठी और एक सख्त फैसला ले लिया । अगले रोज़ जब मंजीत उससे मिलने आई तो वो उसे लेकर सीधी बाहर निकल गई..
क्या हुआ फराह …इतना भगाती हुई क्यों लाई हो मुझे …
तुम्हे एक हेल्प करनी होगी पर वादा करो समर को नहीं पता चलना चाहिए ।
कैसी हेल्प ..
पहले तुम अभी मुझे घर लेकर चलो ..मैं सब बताती हूँ ।
मगर क्यों…
पहले चलो यहाँ से रास्ते में बताउंगी ।
और वो मंजीत को अपने साथ लेकर घर चली आई ।
घर के अंदर जाते ही उसने अपने वार्डरॉब से से सारी जूलरीज निकाल ली और उन्हें मंजीत के हाथ पर रखते हुए बोली ।
तुम ये मेरी सारी जूलरीज लेकर अभी जाओ और कॅश फॉर गोल्ड में एक्सचेंज करा लाओ ।जितना अमांउंट मिलता है ले लेना । मैं बाक़ी के ज़ेवर लॉकर से बाद में निकाल लूंगी अगर और ज़रूरत हुई तो ।
अभी फिलहाल तुम ये कर दो ..और कोई सवाल न करो प्लीज ।
और हाँ ये चेक भी ले लो .. मेरे पास कुछ सेविंग्स हैं कहते हुए उसने एक चेक साइन कर उसे दे दिया।
मंजीत अब उसकी जूलरीज लेते हुए हिचकिचा रही थी।
चेक तो ठीक है फराह पर ये ज़ेवर रहने दो यार !!
मेरे पास भी कुछ सेविंग्स हैं , कुछ मैं निकाल लेती हूं न। ये जूलरी – वूलरी तुम रहने दो ।
उसकी इस बात पर फराह ने एकदम से उसे रोक दिया था।
नो मंजीत , तुम अब ये सब तो न करो यार । पहले ही ऑफिस से लीव ले चुकी हो ।हर दिन मेरे पास रहती हो। तुम तो इस वक्त सबसे बड़ा सपोर्ट हो मेरे लिए, और वैसै भी ये जूलरीज आड़े वक्त में काम न आए तो फिर क्या।
मंजीत उसकी इस दलील पर चुप हो गई थी ,मगर अब भी वो डर रही थी।
बट फराह , ये सब करने से पहले तुम एक दफा समर भाई से पूछ तो लो ।
समर का नाम आते ही फराह फिर दर्द से तड़प गई थी।
कहाँ पूछूं और किससे पूछूं मंजू । तुमसे तो कुछ भी छुपा नहीं है । वो वो तो मेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहते । और न ही अपनी कोई प्रॉब्लम में कुछ कहेंगे वो ।
मैंने उन्हें परेशान देखा , डॉक्टर से ज्यादा अमाउंट की बात करते देखा तभी तो तुम्हे कहा न। कहीं न कहीं उन्हें मुशिकल आ रही होगी। हर दिन इतना अमाउंट डिपॉजिट करने में। पर मर्द हैं न। मुझसे कहेंगे तो मेल ईगो हर्ट हो जाएगी उनकी।
मंजीत संमझ गई थी वो क्या कहना चाह रही थी।
अच्छा बाबा ठीक है तुम जैसा कहोगी सब वैसा हो जाएगा ।
अच्छा मैं चलती हूँ ।
पर फराह ने उसे फिर से रोक दिया था।
रुको मुझे फिर से ड्राप कर दो हॉस्पिटल ।
नहीं यार अब घर आ गई हो तो आज तुम घर पर रुको । सुबह चली जाना । अभी जब मैं ये अमाउंट देने हॉस्पिटल जाउंगी तो कह दूंगी ,या तुम कॉल कर देना अपने मियाँ को ।
कहकर वो चली गई थी।
मंजीत की इस आखिरी लाइन पर फराह ने एक आह भरी थी।
वो कहती भी तो किससे , वो समर जो इस भरी दुनिया में उसका सबसे अपना था वो तो उसकी तरफ खुलने वाले सारे दरवाज़े बंद कर चुका था ।
अगले दिन समर ने मंजीत के हाथ फराह का चेक तो ले लिया था मगर उसके हाथ में कैश देखकर वो चौंक गया था ।
इतना कैश… इतना कैश फराह ने दिया तुम्हें।
मंजीत ने हकलाते हुए कहा।
जी .. हाँ समर भाई वो फराह ने दिया था और आपको देने के लिए कहा था ।
समर एक दम से शॉक्ड था।
नहीं ..बिलकुल नहीं ।
इतना कैश तो घर में था ही नहीं । कल मैने घर का सारा कैश निकाल लिया था। तुम कहाँ से लाई हो या उसने तुम्हे कैसे दिया सच सच बताओ ।
समर की उस बात पर मंजीत ने उसे टालते हुए कहा था।
नो समर भाई । ये मुझे फराह ने ही दिया है।हो सकता है उसके पास कहीं अलग से रखा होगा।
You know ..ना लेडीज की प्राइवेट सेविंग्स।
मंजीत की ये सफाई अब समर के गले नहीं उतर रही थी।
नो मंजीत। इटस नॉट पॉसिबल। घर में क्या है क्या नहीं हम दोनों की नॉलेज में रहता है। I Know her, वो मुझसे कुछ भी सीक्रेट नहीं रखती।
समर कहने को तो कह गया पर अपनी ही कही बात पर वो एकदम से खामोश हो गया। जिसे मंजीत समझ नहीं सकी।
और समर की रौबदार आवाज़ से वो वैसे भी कम बोलती थे उसके सामने ।
उसने दो मिनट में ही सारी कहानी कह डाली थी उसे ।
क्या ..!!! तुमने सारी जूलरीज एक्सचेंज में दे दी , और और तुम दोनों ने मुझे बताया भी नहीं ।
उसका तो दिमाग़ वैसे भी ठिकाने पर नहीं चल रहा , अब तुम तो रहने ही दो ।
बस उस जगह का एड्रेस और स्लिप दो । जहाँ से तुमने ये पैसे लिए हैं, मैं उसके ज़ेवर वापस ले आऊंगा
अभी मैं हूँ और जिंदा हूं , उसे ऐसी कोई बेवकूफाना हरकत करने की ज़रूरत नहीं थी।
अब मंजीत न डरते डरते समर से सवाल किया था।
आप दोनों मियां – बीवी के लफड़ें में मैं तो फंस गई न । अब वो फराह पूछेगी तो क्या कहूंगी। जाते ही सौ सवाल करेगी वो । आपने तो मुझे धर्म संकट में डाल दिया ।
उसकी इस बात पर समर ने धीरे से कहा था।
उसे कह देना की मैंने पैसे ले लिए थे ,कहकर वो चला गया ।
मगर उस रोज़ के बाद से फराह ने जो सख्त क़दम उठाया तो उसे पीछे नहीं लिया ….वो हर दिन सुबह से शाम तक हॉस्पिटल में रहती और समर के आने से ऐन पहले वहां से निकल जाती । जो रात में शीनू के साथ रहता ।
उस हादसे को पंद्रह दिन होने को थे । समर ने अब ऑफिस ज्वाइन कर लिया था , उसकी सारी लीव खत्म जो हो गई थी।
मगर फराह ने तो जैसे मुसलसल पर्दा कर लिया था समर से । वो अपनी एक झलक भी उस पर पड़ने नहीं देती । वो सुबह से शाम तक शीनू के साथ रहती और शाम में समर के आने के टाइम हॉस्पिटल के रूम से बाहर देखती रहती । जैसे ही वो कॉरिडोर में नज़र आता । वो वहां से निकल जाती ।