Maid in Metro
उसे उम्मीद थी की वो उसकी किचन के काम में भी मदद कर देगी .।
मीना अक्सर उसका छूटा बढ़ा काम कर देती ,जब भी थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम होता उसके पास ।
सुबह के वक़्त तो वैसे भी कोई अपना एक मिनट नहीं खर्च करता किसी पर, जिसका एग्जाम्पल वो चंद लम्हे पहले अपने डियर हस्बेंड की मार्फ़त देख चुकी थी ।
और ऐसे में मीना उसे एक फरिश्ता सिफ़त शख़्सियत ही दिखाई देती .।
मीना के मामले में तो वो बिलकुल एहतियात से ही रहती।
वो चाहे तो समर को नाराज़ कर दे या शीनू को सुबह सुबह डाँट दे .।
.पर मगर मीना को सारी खुदाई एक तरफ मजाल है ।
के वो कुछ भी ऐसा बोल दे जिससे की आनेवाले वक़्त में उसे बिला वजह परेशान होना पड़े..।
घरों में काम करनेवाली मेड तो आज की इस भाग दौड़ की ज़िंदगी का हिस्सा हैं ।
ख़ासकर वर्किंग कपल्स की लाइफ का निहायत ही अहमतरीन अनअवॉइडेबल पार्ट हैं ।
और इनके बग़ैर एक दिन भी सलीक़े से बिना किसी प्रॉब्लम के निकालना निहायत ही मुश्किल मामला बन जाता है ।
ये तो मॉडर्न अरबन वर्किंग कल्चर की लाइफ लाइन में तब्दील हो चुकी हैं ।
और आज के ज़माने की स्मार्ट वुमन इनकी अहमियत से बखूबी वाक़फ़ियत रखती हैं।
बहरहाल फरह भी नयी पीढ़ी की स्मार्ट वुमन में ही शुमार थी , वो भी इस मामले में काफी सीरियस थी ।
और इन्ही सहूलतों की बदौलत तो उसकी घर और बाहर की दोनों तरफ की लाइफ सही ट्रैक पर निकल रही थी ।
मीना के आने के बाद उसका काम वाक़ई तेज़ी से निबटने लगा ,मीना जल्दी जल्दी क्लीनिंग,डस्टिंग कर रही थी ।
और फरह ख़ुद सबका ब्रेकफास्ट और लंच तैयार करने लगी,इसी बीच उसने शीनू को भी रेडी कर दिया था ।
जो आज भी स्कूल जाने से ना नुकर कर रहा था ,वो कभी प्यार से कभी डाँट से उसे तैयार कर रही थी ।
ऐसे नहीं करते बेटा ,अब आप बड़े हो रहे हैं और देखो तुम फर्स्ट स्टैण्डर्ड में आ चुके हो,अब भी नर्सरी के बच्चों की तरह रोते हो..।
वेरी बैड ….
अच्छे बच्चे मम्मा को तंग नहीं करते ,देखो आपकी वजह से मम्मा पापा लेट हो जाएंगे ।
पर मम्मा …आप प्रॉमिस करो आप जल्दी आओगी ,मुझे क्रेच में अच्छा नहीं लगता ।आप जब आती हो तब देर हो जाती है,मैं अपने फ्रेंड्स के साथ खेल भी नहीं पाता।
फिर घर आकर आप होम वर्क भी करवाती हो .
तो क्या होमवर्क नहीं करना तुम्हे , दिस इज बैड शीनू .. ये ग़लत है बेटे ।
होमवर्क तो सभी को करना होता है ।
हाँ ..अगर आपको क्रेच में कोई प्रॉब्लम है तो बताओ ,मैं बात करती हूँ वहाँ ।
अच्छा अच्छा ..अब जल्दी करो ..जाकर अपना ब्रेकफास्ट फिनिश करो.।
मैं अभी आती हूँ ,कहकर वो अपने रूम में तैयार होने लगी ।
तब तक समर भी फ्रेश होकर आ चुका था ।उसने डाइनिंग टेबल से जूस का गिलास लिया और एक सैंडविच उठाया …।
उसे हड़बड़ी में खाता देख पास बैठे शायान से रहा न गया ।
पापा ..पापा .आराम से खाएं आप,ऐसे तो मैं भी नहीं खाता ।मुझे ऐसे खाते देख मम्मा नाराज़ होती हैं.।
और मुझे डाँट भी पड़ती है।
देखो शीनू मुझे कॉपी करने की ज़रूरत नहीं तुम्हे, वैसे भी आज देर हो गयी है ।तुम अपना बैग और वाटर बॉटल लो और साथ चलो… ।
मम्मा बाद में आएंगी ।
कहते हुए समर ने अपना लैपटॉप बैग लिया और कार की चाभी और मोबाइल हाथ में लेकर निकलते हुए कहा ..।
फरह. सुनो तो यार… तुम तो अब तक रेडी नहीं हो ,और ये मीना का काम भी फिनिश नहीं हुआ है।
अब आज तो मैं बिल्कुल हीं नही रुक सकता ।मैं शीनू को स्कूल ड्राप करता हुआ ऑफिस चला जाऊंगा ।
प्लीज.. तुमआज ऑटो ले लेना ।
ओके बाय.. शाम में मिलते हैं…तभी फरह दनदनाती हुई ड्राइंग रूम .में आई और पीछे से कहा .।
इट्स नॉट फेयर …समर ,तुम दो मिनट रुक सकते थे ।अब मुझे ऑफिस के लिए और देर होगी न .
तुम बहुत बुरे हो …वह बुदबुदाती रही ।
पर तब तक समर उसकी नज़रों से ओझल हो चुका था …।
दस मिनट बाद वो भी बाहर से ऑटो लेकर ऑफिस के लिए निकल गयी.. पर सारी रेड लाइट्स ने शायद कसम ली थी की एक के बाद एक जलती ही जाएंगी .. पूरे रास्ते उसे कोई सीधा ग्रीन सिग्नल मिला ही नहीं था ..उसकी एक नज़र बाहर और एक नज़र अपनी घड़ी पर थी… घड़ी तो अपने सही वक़्त पर थी पर फराह अपने आनेवाले वक़्त के सही होने पर अंदेशों में थी..
ऑफिस के बाहर लिफ्ट में ही उसे मंजीत मिल गयी जो और वो भी वैसे हापंती कांपती लिफ्ट के अंदर आयी थी ..उसे देखते ही फराह बरजिस्ता बोल उठी ..
क्या बात है ..मैडम …तुम क्यों ऐसे गिरती पड़ती आ रही हो ..तुम्हारे सर पर कौन सी तलवार लटकती है..या पैरों में घर गृहस्थी की ज़ंजीरें रोकती हैं..तुम तो आज़ाद परिंदा हो …फिर तुम क्यों मेरी तरह लेट पहुंचनेवालों की फेहरिस्त में शुमार हो रही हो ….
मंजीत जो आयी तो थी भागती हुई पर उसकी इस बात पर हँसते हुए बोल पड़ी…
अरे ..फराह डिअर ….यही तो प्रॉब्लम है ..आज़ादी के मज़े कुछ ज़्यादा ही ले लिए इस वीकेंड …कल लेट नाईट मूवी देख ली ..तो नींद उचट गई, बाक़ी बचा टाइम व्हाट्सप्प और फेसबुक पर लुटा दिया. जब सुबह आँख खुली ..तो . इतनी देर हो गई की आज कॉफी भी नहीं पी सकी ..ऊपर से प्रेजेंटेशन भी कम्पलीट नहीं हो सका …बस ऊपरवाला आज का दिन निकाल दे और उस मोगैम्बो से जान बचा ले.. ..
और तुम बताओ ..तुम्हारा वीक एन्ड कैसा था ..
तब तक वो दोनों ऑफिस के अंदर आ चुकी थीं
साथ साथ चलते हुए फराह ने कहा ..
क्या और कैसा वीकेंड ..मुझे तो पता ही नहीं चला दो दिन कैसे गुज़र गए.. परसों किसी रिश्तेदार के घर जाना हुआ ..और बचा कल का मज़लूम इतवार ..जो सिर्फ कहने के लिए ही इतवार था .रोज़ाना मशीन से धुलने के बाद भी हफ्ते के सारे छूटे बचे कपड़े थे…शायान की बुक्स और यूनिफॉर्म भी सेट करनी थीं.. नया सेशन तो लास्ट वीक ही शुरू हो गया ..पर नयी बुक्स का सिलसिला अभी तक चल रहा है ..
.ऊपर से ज़ीशान के फरमाइशी खानों की ज़िद भी इतवार के रोज़ अपने उरूज पर ही होती है ….
तो क्या तुम्हारे मियाँ घर पर कुछ भी नहीं करते ..
हाँ करते हैं ना , ज़्यादा हुआ तो शीनू को एंगेज कर देते हैं किसी एक्टिविटी में ..या अपने साथ क्रिकेट दिखलाने लगते हैं..
उससे ज़्यादा कुछ भी नहीं..क्यूंकी उन्हें भी अपना खुद के लिए मी टाइम चाहिए होता है..और फिर तुम अकेली तो नही इस व्हाट्सप्प और फेसबुक की बेदाम ग़ुलाम..इसके तो दीवाने हज़ारों हैं..वो भी अपना सारा … वक़्त बेफिक्र इनकी नज़र कर देते हैं…..चाहे बाद में वक़्त मिले या न मिले किसी दूसरे मसले के लिए ..खैर रहने दो
चलो आज लगता है मोगैम्बो की सवारी भी लेट है वरना …
अरे. .वरना ..हमारा क्या होता …कहते हुए वो दोनों बेसाख्ता हंस पड़ी
और अपने काम में लग गईं ..